भोपाल। 
सेवानिवृत आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया के यहां 28 करोड़ से ज्यादा की काली कमाई लोकायुक्त छापे में उजागर हुई है। यह छापा लोकायुक्त ने लगातार आ रही शिकायतों के कारण मारा था। दरअसल भदौरियां शराब नीलामी में देरी के मामले में निलंबित हुआ था, लेकिन नौकरी में न रहते हुए भी वह आलीराजपुर, झाबुआ के शराब सिंडिकेट से जुड़ा था और कमाई भी कर रहा था। उसका यह रवैया विभाग के ही दूसरे अफसरों को नागवार था और फिर शिकायतों का दौर शुरू हो गया था। वो अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करके शराब तस्करी में महत्वपूर्ण किरदार निभा रहा था। उसे जंगल के रास्ते शराब गुजरात भेजने के सभी रास्तों की जानकारी थी। जैसे मुंबई और गुजरात के बीच शराब तस्करी के रास्तों की जानकारी शराब माफिया अब्दुल लतीफ को थी। बाद में  तथाकथित रूप से लतीफ पर शाहरूख खान की फिल्म 'रईस' बनी थी।  
काली कमाई पीले सोने में लगाई
आबकारी विभाग से सेवानिवृत अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया सोना प्रेमी निकाला। उसने अपनी काली कमाई प्रापर्टी, एशो आराम में तो खर्च की। मोटी रकम सोने में भी लगाई। उसके फ्लैट पर लोकायुक्त छापे में अब दो करोड़ का सोना मिला था। भदौरिया के परिवार के लाॅकरों ने भी खूब सोना उगला। उसकी बेटी और बहू के खाते से चार करोड़ का सोना मिला है। सोना रखने के लिए उसने बड़े लाॅकर ले रखे थे। पांच किलो से ज्यादा सोना भदौरिया व उसके परिवार के पास से मिल चुका है।
सोने को लोकायुक्त छापे से बचाने के लिए भदौरिया लाॅकरों को खोलने में आनकानी कर रहा था। अफसर घर पर जा रहे थे तो वह दरवाजा ही नहीं खोलता था। अफसरों को उसके घर नोटिस चस्पा करना पड़ा। तीन नोटिस देने के बाद लाॅकर खोला गया। भदौरिया की बेटी अपूर्वा के लाॅकर को खोला। उसमें कई सोने के आभूषण मिले। इतनी काली कमाई का आंकड़ा इस साल मारे गए लोकायुक्त छापों में किसी अधिकारी के यहां नहीं मिला है, जितना भदौरिया के यहां मिला। पूरे सेवा काल में भदौरिया की कमाई दो करोड़ रुपये थी, लेकिन उसके पास से 27 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति अब तक मिल चुकी है। यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
अवैध शराब के नेटवर्क की अहम कड़ी था भदौरिया

भदौरिया की नौकरी ज्यादातर आदिवासीबहुल्य जिले धार, झाबुआ, आलीराजपुर में रही। यहां से गुजरात की बार्डर करीब है। गुजरात में शराबबंदी है। मध्य प्रदेश से ही सबसे ज्यादा अवैध शराब गुजरात जाती है। इस सिंडिकेट में एक किरदार भदौरिया भी रहा है। इसके अलावा टैंडरों को मनचाहे ठेकेदारों को दिलवाने में भी उसकी भूमिका रहती थी। इस कारण पांच साल पहले वह निलंबित हो चुका था और सेवानिवृति तक बहाल नहीं हो पाया। आलीराजपुर से जंगल के कई रास्ते हैं, जो गुजरात तक जाते हैं। इन रास्तों से ही अवैध शराब गुजरात तक पहुँचाई जाती है। आला अफ़सरों के साथ भी भदौरिया ने पैसे के दम पर इतनी जमावट कर ली थी कि उनका तबादला भी धार-झाबुआ और आस-पास के ज़िलों में ही होता था। वे अपनी मनचाही पोस्टिंग कराते थे।