इंदौर। 
इंदौर के महू स्थित पाथ ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यवाही तीसरे दिन भी जारी है। जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम महू माल रोड स्थित बंगला नंबर 76 पर जांच कर रही है। मंगलवार सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति और कारोबार जगत में हलचल मचा दी है।
सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई अनिल अंबानी के लोन घोटाले से जुड़ी हुई है। करोड़ों रुपए की रकम डमी कंपनियों के जरिए दुबई भेजे जाने की बात सामने आ रही है। इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानून सेमा के तहत की गई है। पाथ ग्रुप पर करीब 10 साल पहले आयकर विभाग ने भी छापा मारा था। 15 साल पहले जयपुर-रिंगस फोरलेन टोल हाईवे रोड का ठेका कंपनी को मिला था और उसने पेटी कॉन्ट्रेक्टर के रूप में पाथ इंडिया से रोड का निर्माण करवाया।
कंस्ट्रक्शन कार्यों से जुड़ा है पाथ ग्रुप
पाथ ग्रुप देशभर में टोल, हाईवे निर्माण और अन्य कंस्ट्रक्शन कार्यों से जुड़ा है। नितिन अग्रवाल इसके मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। कंपनी के डायरेक्टर मंडल में निपुन अग्रवाल, सक्षम अग्रवाल, नीति अग्रवाल और संतोष अग्रवाल शामिल हैं। इसके अलावा आशीष अग्रवाल और आदित्य उपाध्याय इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं। समूह की एक दर्जन से ज्यादा कंपनियां अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर कार्यरत हैं।
आकाश विजयवर्गीय का नाम आया सामने
ईडी जांच में गुना-श्योपुर पाथवेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का भी जिक्र है। इस कंपनी में भाजपा नेता और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय 30 सितंबर 2017 से डायरेक्टर पद पर हैं। उनके साथ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के भाई भी नॉमिनी डायरेक्टर हैं। इस कंपनी के अन्य डायरेक्टरों में मोनिका सिंह, नितिन अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, विक्रम मेवारा, निपुन अग्रवाल और अतुल शाह शामिल हैं। आकाश विजयवर्गीय ने वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव के दौरान अपने शपथ पत्र में भी इस कंपनी की हिस्सेदारी का जिक्र किया था। उनके पास करीब 3.55 लाख रुपए की हिस्सेदारी दर्ज है।
हरदा खनन पेनल्टी विवाद और आईएएस गौड़ा की भूमिका
पाथ ग्रुप हाल ही में हरदा जिले के खनन विवाद में भी चर्चा में आया था। 2021-22 में कंपनी को रहटगांव तहसील के अंधेर खेड़ी गांव में मुरम और गिट्टी खनन का ठेका मिला था। जांच में 51.67 करोड़ रुपए का अवैध खनन सामने आया। तत्कालीन एडीएम प्रवीण फुलपगरे की जांच रिपोर्ट में यह राशि दर्ज हुई थी, लेकिन बाद में अपर कलेक्टर डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने सुनवाई करते हुए इस पेनल्टी को घटाकर मात्र 4,032 रुपए कर दिया।
इसमें पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अवैध उत्खनन जुर्माना प्रत्येक 2,016 रुपए का रहा। गौड़ा ने अपने आदेश को तथ्यों और सुनवाई के आधार पर उचित बताया, लेकिन चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि वे कंपनी से जुड़े कई लोगों से लगातार संपर्क में रहे हैं।