चूहों पर मेहरबान रही कंपनी, 20 लाख लेकर भगाए सिर्फ डेढ़ सौ चूहे
इंदौर
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े एमवाय अस्पताल का चूहाकांड अब प्रदेश सरकार का सिरदर्द बन गया है। इस पर राजनीति गरमाने लगी है। अब एमवाय अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की पोल भी खुल रही है। सफाई का जिम्मा उठाने वाली एजाइल कंपनी समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल करती तो दो नवजात चूहों के काटने का शिकार नहीं होते। पेस्ट कंट्रोल के लिए औसतन कंपनी को हर माह दो लाख रुपये का भुगतान किया जाता है,लेकिन जनवरी से अब तक 20 लाख रुपये लेकर कंपनी ने सिर्फ डेढ़ सौ चूहे भगाए। पेस्ट कंट्रोल कागजों पर होता रहा और अब हकीकत सामने है।चूहाकांड के बाद कंपनी पर जुर्माना भी लगाया तो सिर्फ एक लाख रुपये का। अब कंपनी को कालीसूची में डालने की तैयारी की जा रही है। आईए जानते है इस चूहाकांड की पूरी कहानी।
महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में चूहों ने दो नवजात शिशुओं के अंग कुतर दिए। एक नवजात की तीन उंगलियां चूहे खा गए, लेकिन नर्सिंग स्टाॅफ ने ध्यान नहीं दिया। दूसरे नवजात का सिर और कंधे चूहों ने कुतरे थे। बीते तीन दिन में दोनो नवजातों की मौत हो गई और अब दौरे, जांच रिपोर्ट, निरीक्षण की खानापूर्ति हो रही है।
मामला ठंडा करने के लिए आधा दर्जन अधिकारियों, कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। जांचें हो रही हैं, लेकिन फिर भी मामला गरमाया हुआ है। बुधवार को मरने वाली बच्ची का शव उसके रिश्तेदारों की इच्छा के अनुसार बिना पोस्टमार्टम के परिवार को सौंप दिया गया। पहले शिशु की मौत की वजह पर भी लीपा-पोती चल रही है। हृदय संबंधी जटिलताएँ, सेप्टीसीमिया और संक्रमण का पता चला है, जो चूहे के काटने से पहले से मौजूद थे।
चूहाकांड पर बहाने कैसे-कैसे
इंदौर में कई निजी अस्पताल भी है, जहां हजारों मरीज भर्ती रहते है, लेकिन वहां चूहों व कीड़े-मकोड़ों को लेकर नियमित पेस्ट कंट्रोल होता है। गलियारों में चूहे पकड़ने के पिंजरे लगाए गए होते है, लेकिन एमवाय में चूहें पकड़ने की कवायद सिर्फ कागजों पर होती रही। कंपनी पेस्ट कंट्रोल के लिए वार्डों को खाली करने का तर्क देती थी, जो डाक्टरों के लिए संभव नहीं होता था और पेस्ट कंट्रोल का काम कागजों पर चलता रहा। अब डाक्टर कहते नजर आ रहे है कि वार्ड में मरीजों के परिजन खाना ले आते है। इस कारण चूहे वार्डों में आ जाते है। यह भी बहाना बनाया जा रहा है कि बारिश होने से चूहों के बिल में पानी भर गया। इस कारण वे बाहर निकाल आए है।
20 करोड़ का भुगतान कर दिया
एमवाय की सफाई, पेस्ट कंट्रोल, सुरक्षा, डेटा इंट्री का काम अलग-अलग देने के बजाए एक ही कंपनी को दे दिया गया। हर माह इसके लिए डेढ़ करोड़ रुपये की राशि दी जाती है। पिछले साल कंपनी को 20 करोड़ का भुगतान एमवाय प्रबंधन ने कर दिया, लेकिन सफाई का आटिड नहीं किया। दो साल पहले ठीक से सफाई नहीं होने पर कंपनी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। कंपनी दो साल एमवाय अस्पताल का काम संभाल रही है। कंपनी पेस्ट कंट्रोल का काम लोकल कांट्रेक्टरों से करती है। खुद के अलग से इसके लिए संसाधन नहीं है।

नए स्मार्टफोन नथिंग फोन (4ए) की है आकर्षक डिजाइन