इंदौर में नागरिकों ने बोला, हमें फ्लैट नहीं ऑक्सीजन चाहिए... आखरी जंगल गिन रहा हैं अंतिम सांसे
इंदौर।
इंदौर के दिल में बसे हुकुमचंद मिल के प्राकृतिक सिटी फॉरेस्ट पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ आज एक बार फिर नागरिकों की आवाज गूंजी। हाउसिंग बोर्ड द्वारा इस हरित धरोहर को काटकर निर्माण कार्य किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में, शहर के पर्यावरण प्रेमी नागरिकों ने शाम 5 बजे से 6 बजे तक राजबाड़ा चौक पर मानव श्रृंखला बनाकर संदेश दिया "पेड़ बचेंगे तो इंदौर बचेगा"।
हमारे बच्चों को सिर्फ सीमेंट का जंगल मिलेगा
यह सिटी फॉरेस्ट केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हजारों पक्षियों, जीव-जंतुओं का घर और शहर की आबोहवा का रक्षक है। नागरिकों का कहना था कि यदि यह वन क्षेत्र नष्ट हुआ तो आने वाली पीढ़ियों को केवल प्रदूषण और कंक्रीट का जंगल मिलेगा।
क्या बनेगा यहां
इस सिटी फॉरेस्ट को काटकर यहां पर फ्लैट बनाकर बेचे जाएंगे। यह जमीन मप्र सरकार के हाउसिंग बोर्ड के पास है। अगले 6 महीने में यहां पर इस सिटी फॉरेस्ट को काटकर फ्लैटों का निर्माण शुरू करने की योजना प्रस्तावित है।

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