डीआईजी राजेश सिंह चंदेल सहित 4 पुलिसकर्मियों पर डकैती का केस दर्ज, ग्वालियर कोर्ट ने थमाया समन
भोपाल।
ग्वालियर जिला न्यायालय ने वर्ष 2023 में धोखाधड़ी के केस में राजीनामा कराने पैसे लेने के मामले मे तत्कालीन एसपी राजेश सिंह चंदेल व तीन पुलिसकर्मी सुरेद्र नाथ यादव, अजय सिंह सिकरवार और संतोष वर्मा के खिलाफ डकैती सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। सीहोर, शिवपुरी व ग्वालियर में एसपी रहे चंदेल वर्तमान में भोपाल देहात में डीआईजी के पद पर हैं। न्यायालय में यह केस पिछले दो साल से सुनवाई में था, जिस पर सोमवार को आदेश सुनाया गया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 22 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया है। मामला ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2023 में चित्रलेखा जैन और विक्रम राणा पर धोखाधड़ी की एफआइआर दर्ज हुई थी। जिस शिकायतकर्ता ने यह एफआइआर दर्ज करवाई थी, उससे बाद में मामले में समझौता हो गया। मामले में परिवाद दायर करने वाले शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अशोक कुमार प्रजापति ने बताया कि जांच अधिकारी ने मामला खत्म करने के एवज में आरोपितों से पैसे की मांग की। लगभग पांच लाख 80 हजार रुपये ले भी लिए। जब पुलिस ने देखा कि आरोपित और भी पैसे दे सकते हैं तो सभी को थाने बुलाकर धमकाया गया। कोर्ट में दी गई दलील के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह यादव के इशारे पर हवलदार संतोष वर्मा ने अनूप राणा के घर से 9.50 लाख रुपए और मामले से जुड़ी एक महिला आरोपी के घर से 15 लाख रुपए लिए।
शिकायतकर्ता और पुलिस को रुपए और देने का बनाते रहे दबाव
बाद में शिकायतकर्ता को 30 लाख रुपये और देने का दबाव बनाते रहे। इससे परेशान होकर आरोपित के भाई अनूप राणा ने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल को एक लिखित शिकायत दी। आरोप है कि एसपी चंदेल ने कोई कार्रवाई न करते हुए मामला उसी थाने को भेज दिया। पुलिस ने थोन की फुटेज को डिलीट किया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने साल 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के सीसीटीवी फुटेज मांगे थे। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई। न्यायालय ने इन सभी तथ्यों का संज्ञान लेकर मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी सहित सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ परिवाद दर्ज कर लिया है।
CCTV फुटेज डिलीट होने पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे थे। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई। मामले में रेडियो पुलिस अधीक्षक की जांच का भी जिक्र सामने आया, जिसमें थाने के स्टाफ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया।
नौकरी के नाम पर ठगी केस से शुरू हुआ विवाद
पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है और अनूप राणा व उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे। वहीं, अनूप राणा का कहना है कि वह खुद ठगी का शिकार हुआ था और अपने भाई की मदद के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को बचाते हुए उससे और उसके भाई से लाखों रुपए वसूले।

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