ग्वालियर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट सरकारी जमीनों पर नाजायज कब्जे को लेकर सख्त नजर आ रहा है। भू माफियओं का कारोबार ज्यादातर हाथ लापरवाह अधिकारियों का होता है। ज्यादातर मामलों में अदालतों में कमजोर पैरवी, जानबूझकर देरी से अपील दायर करने और रिकॉर्ड छिपाने जैसी गतिविधियों की वजह से सरकार केस हार जाती है और फैसला निजी पक्ष में जाता है। ऐसे मामलों में अब कोर्ट ने सख्त गाइडलाइन जारी की। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने हाईकोर्ट में एक नीति पेश है जिसमें स्प्ष्ट कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत से सरकार केस हारती है, तो उस जमीन या राशि के नुकसान की भरपाई संबंधित अधिकारी की जेब से की जाएगी। ऐसे ही एक मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और राजस्व विभाग से जवाब मांगा था। इस मामले में दोनों ही अधिकारियों की बड़ी लापरवाही पाई गई थी।
ये है पूरा मामला
मामला ग्वालियर जिले की कोटा लश्कर स्थित मंदिर की 5.19 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है। यह जमीन निजी हाथों में सिर्फ इसलिए चली गईं क्योंकि सरकारी वकील और अधिकारी समय पर पुख्ता रिकॉर्ड पेश नहीं किए और फैसला निजी पक्ष के हक में गया। सरकारी वकील मामले में अपील करने में 3327 दिन की देरी की थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि कलेक्टर फेल हो गए हैं। कलेक्टर अपने कर्तव्य के पालन में विफल रही हैं। कोर्ट ने कहा कि कलेक्ट्रेट में किसी ने जानबूझकर फाइलें हटाई हैं। कोर्ट ने मामले की जांच के आदेश जारी करते हुए कहा कि अब इस पूरे 'फाइल कांड' की जांच प्रमुख सचिव (राजस्व) करेंगे।
वसूली संबंधित शासकीय सेवक से की जाएगी
यदि इस मामाले में प्रशासन की लापरवाही पाई गई तो हो सकता है आने वाले दिनों में सामान्य प्रशासन विभाग की नई गाइडलाइन के अनुसार आर्थिक नुकसान की वसूली संबंधित शासकीय सेवक से की जाए। या बड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।