ग्वालियर।
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक लंबे समय से चली आ रही सुस्ती अब अचानक हलचल में बदल गई है, जिसका केंद्र ग्वालियर-चंबल अंचल बना हुआ है। पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही भाजपा ने प्रदेश की सियासत में एक नया अध्याय लिखने की शुरुआत कर दी है। लगभग 8 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस बड़ी जिम्मेदारी को उनके समर्थक पवैया की एक मजबूत राजनीतिक वापसी के तौर पर देख रहे हैं। यह नियुक्ति केवल एक पद का आवंटन नहीं है, बल्कि इस अंचल के सियासी समीकरणों को साधने का एक बड़ा दांव है, जहाँ वर्तमान में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बढ़ता दबदबा और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की मजबूत पकड़ सर्वविदित है। भाजपा ने पवैया को मुख्यधारा में वापस लाकर अंचल में एक तीसरा शक्ति केंद्र खड़ा करने की कोशिश की है, ताकि क्षेत्र में शक्ति संतुलन बना रहे।
वर्तमान में सिंधिया के पास प्रद्युम्न सिंह तोमर, तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत जैसे दिग्गज मंत्रियों की फौज है, वहीं नरेंद्र सिंह तोमर भी क्षेत्र में खासी पैठ रखते हैं। ऐसे में जयभान सिंह पवैया, जो अपने प्रखर हिंदुत्व और सिंधिया परिवार के पारंपरिक राजनीतिक विरोधी के रूप में पहचाने जाते हैं, उनकी वापसी सिंधिया के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इस नियुक्ति के बाद पवैया अब राज्यसभा की दौड़ से लगभग बाहर हो गए हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि संगठन उन्हें धरातल पर कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रखकर पार्टी की जड़ों को और मजबूत करना चाहता है। विशेष रूप से मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए पवैया एक भरोसेमंद चेहरे साबित हो सकते हैं, क्योंकि दोनों ही नेता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक पृष्ठभूमि से आते हैं। ग्वालियर-चंबल की राजनीति में 'महल' विरोधी राजनीति का चेहरा रहे पवैया अब राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं, जो आने वाले समय में अंचल के कई राजनीतिक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है।