ग्वालियर नगर निगम कंगाली की कगार पर! सैलरी के लिए बैंक से लेना पड़ा 15 करोड़ का कर्ज
ग्वालियर।
ग्वालियर नगर निगम कर्मचारियों को वेतन-भत्ते देने के लिए बैंक से 15 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट लेगा। यह निर्णय मेयर इन काउंसिल (MIC) की बैठक में लिया गया, जहां निगम की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया। हर माह लगभग 18 करोड़ रुपये वेतन-भत्तों और पेंशन के रूप में कर्मचारियों को दिए जाते हैं, जिसके लिए फंड की कमी के चलते यह कर्ज लिया जा रहा है।
लगातार बिगड़ रही आर्थिक स्थिति
ग्वालियर नगर निगम की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। कर्मचारियों को समय पर वेतन-भत्ते देने में असमर्थ निगम ने अब बैंक से ओवरड्राफ्ट लेने का निर्णय लिया है। निगम की 20 करोड़ रुपये की एफडी पर 15 करोड़ रुपये तक की ओवरड्राफ्ट (OD) लिमिट 0.25 प्रतिशत ब्याज पर लेने का निर्णय लिया गया है। सोमवार को महापौर डॉ. शोभा सिकरवार की अध्यक्षता में हुई मेयर इन काउंसिल (MIC) की बैठक में इसे स्वीकृत करने की पुष्टि की गई।
हर महीने होता है 18 करोड़ का ट्रांसफर
नगर निगम द्वारा हर माह लगभग 18 करोड़ रुपये की राशि वेतन-भत्तों और पेंशन के रूप में कर्मचारियों के खातों में ट्रांसफर की जाती है। फंड की कमी से जूझ रहा नगर निगम अपने कर्मचारियों को ही समय से वेतन-भत्तों का भुगतान नहीं कर पा रहा है। जैसे-जैसे संपत्तिकर की वसूली होती है, वैसे वेतन कर्मचारियों के खातों में डाला जाता है।
सैलरी बांटने के लिए भी पैसा नहीं
ऐसे में अब नगर निगम द्वारा वेतन बांटने के लिए बैंक से कर्जा लिया जाएगा। यह स्थिति निगम की कंगाली का आलम दर्शाती है। MIC बैठक में विद्युत केबल खरीद के मामले में भी जांच कमेटी गठित की गई है। MIC सदस्य अवधेश कौरव ने मुद्दा उठाया कि विद्युत केबल खरीद के टेंडर खोलने के बाद अलग से कंपनियों से दस्तावेज लिए गए थे। ऐसे में इस मामले की जांच कराने की आवश्यकता है।
महापौर ने दिए जांच के आदेश
इस पर महापौर ने दो प्रभारी सदस्यों के साथ ही एक रिटायर अधिकारी को कमेटी में शामिल कर जांच कराने के निर्देश दिए। इससे पहले बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों की आरएफपी की शर्तों में संशोधनों की पुष्टि की गई। रेत, भूसा, गिट्टी, पत्थर की शुल्क वसूली के लिए वर्ष 2023-24 की शेष अवधि की धरोहर राशि वापस करने के बिंदु पर MIC सदस्यों ने कहा कि निगमायुक्त को स्वयं ही इस मामले में निर्णय लेना चाहिए।
बैठक में शामिल रहे ये सदस्य
बैठक में मेयर इन काउंसिल सदस्य अवधेश कौरव, नाथूराम ठेकेदार, शकील मंसूरी, विनोद यादव माठू, गायत्री मंडेलिया, प्रेमलता जैन, संध्या कुशवाह, अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव, प्रदीप तोमर, मुनीष सिंह सिकरवार, अपर आयुक्त वित्त रजनी शुक्ला आदि मौजूद थे।
जनता से जुड़े काम भी अटके
निगम की खराब वित्तीय हालत किसी से छुपी नहीं है। यही कारण है कि जनता से जुड़े हुए कार्य लगातार अटक रहे हैं। गली-मोहल्लों की सड़कें बनाने के लिए निगम के पास फंड नहीं है। मुख्य मार्गों को यदि छोड़ दिया जाए तो अधिकतर कालोनियों, गली-मोहल्लों में सड़कें जर्जर स्थिति में हैं।

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