विधानसभा अध्यक्ष के बेटे का जन्मदिन, जुलूस में फंसी एम्बुलेंस:मुरैना में घंटों परेशान हुआ नवजात; दिल में छेद होने पर जयपुर रेफर हुआ था
मुरैना।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे प्रबल प्रताप सिंह तोमर के जन्मदिन पर निकले जुलूस के बाद लगे जाम में दो एम्बुलेंस घंटों फंसी रही। जिसमें से एक में नवजात बच्चे काे दिल में छेद होने की वजह से जयपुर ले जाया जा रहा था। जाम के वीडियाे सामने आने के बाद बीजेपी जिलाध्यक्ष ने इसे निजी कार्यक्रम बताया, वहीं आयोजन की परमिशन देने वाले एसडीएम ने फोन नहीं उठाया।
यह है पूरा मामला
प्रबल प्रताप सिंह तोमर का जन्मदिन 3 अक्टूबर को उनके समर्थकों ने बड़े जुलूस के साथ मनाया। यह स्वागत रैली उनके गृह गांव औरेठी स्थित आसमानी माता मंदिर से शुरू होकर मुरैना के बैरियर चौराहे स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस तक पहुंची। हालांकि, इस दौरान नियमों की जमकर अनदेखी की गई। स्वागत जुलूस के कारण दो एम्बुलेंस घंटों जाम में फंसी रहीं, जिनमें रेफर मरीजों को इलाज के लिए जयपुर और ग्वालियर ले जाया जा रहा था।
गांव से शहर तक 50 किमी लंबा स्वागत जुलूस
कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने प्रबल प्रताप सिंह के जन्मदिन पर उनके गांव औरेठी से रैली की शुरुआत की। यह जुलूस पोरसा और अंबाह कस्बों से होते हुए करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय कर देर रात मुरैना जिला मुख्यालय पहुंचा। रैली में बैंड-बाजे, गाड़ियां और भारी भीड़ शामिल थी।
एम्बुलेंस फंसी रही, नवजात मरीज को घंटों इंतजार
जिला अस्पताल के एम्बुलेंस चालक रामचरित्र पिप्पल ने बताया कि उन्होंने एक माह के नवजात को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराने ले जाना था।
एम्बुलेंस चालक ने बताया
बच्चे के दिल में छेद था। उसे तुरंत रेफर किया गया, लेकिन जुलूस के कारण हम घंटों फंसे रहे। मेरे साथ एक और एम्बुलेंस भी थी, वो भी रुक गई। साहब, जाम की मत पूछो, बड़े नेता लोग हैं, कुछ भी कर सकते हैं।
कार्यक्रम को लेकर प्रशासन बेखबर
इस अव्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और भाजपा दोनों ने कार्यक्रम से पल्ला झाड़ लिया।
भाजपा जिलाध्यक्ष कमलेश कुशवाह ने कहा कि यह भाजपा का कार्यक्रम नहीं था, ना ही पार्टी की ओर से कोई अनुमति ली गई। यह उनके समर्थकों द्वारा निजी स्तर पर आयोजित किया गया। वहीं मुरैना के एडीएम अश्वनी कुमार रावत ने कहा कि परमिशन हमारे स्तर से नहीं दी जाती, यह काम एसडीएम कार्यालय का होता है। मुझे इस कार्यक्रम की जानकारी नहीं है।”एसडीएम भूपेंद्र सिंह कुशवाह से इस रैली की अनुमति को लेकर संपर्क करना चाहा, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। कई बार कॉल करने के बाद भी उन्होंने फोन काट दिया और प्रतिक्रिया देने से बचते रहे।
लोगों में आक्रोश
इस पूरे घटनाक्रम लाेगों में आक्रोश दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क पर निकलने वाले जुलूसों के दौरान प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह से नदारद था। बीमार मरीजों की एम्बुलेंस जुलूस में फंसती रही, पर किसी नेता या आयोजक ने ध्यान नहीं दिया। क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं, नेताओं और उनके परिजनों के लिए नहीं।

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