BJP में खुली बगावत: 'कमलनाथ सरकार गिराने वाले नरोत्तम मिश्रा की हुई राजनीतिक हत्या', पूर्व विधायक ममता मीना का अपनी ही पार्टी पर बड़ा हमला
गुना।
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकटों की घोषणा होते ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर की रार अब खुलकर सामने आ गई है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी के अंदर ही तीखे विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं। इस बार मोर्चा खोला है, चाचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीना ने, जिन्होंने भाजपा नेतृत्व के इस फैसले को पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
'कमलनाथ सरकार गिराने का मिला ये इनाम'
पूर्व विधायक ममता मीना ने सीधे तौर पर भाजपा आलाकमान को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराकर भाजपा की वापसी कराने में नरोत्तम मिश्रा की मुख्य भूमिका थी। लेकिन आज बदले में पार्टी ने उनका टिकट काटकर उन्हें 'इनाम' दिया है।
प्रदेशाध्यक्ष नहीं बनाया, राज्यसभा नहीं भेजा, अब टिकट काटा
उन्होंने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा की हार को भी एक गहरी साजिश का हिस्सा बताया। मीना ने कहा, कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि मिश्रा जी को राज्यसभा भेजा जाएगा या संगठन में प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन इसके उलट उनकी 'राजनीतिक हत्या' कर दी गई।
दिग्गजों को हाशिए पर धकेलने का आरोप
पूर्व विधायक ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह चाचौड़ा से उनका टिकट काटा गया, ठीक उसी ढर्रे पर अब पार्टी के बाकी कद्दावर नेताओं को भी किनारे लगाया जा रहा है। उन्होंने प्रह्लाद पटेल, उमा भारती, कैलाश विजयवर्गीय, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया जैसे कद्दावर नेताओं के नामों का जिक्र करते हुए दावा किया कि भाजपा में अब जमीनी और वरिष्ठ नेताओं को जानबूझकर हाशिए पर धकेला जा रहा है।
भाजपा में 'कांग्रेस जैसे' बिखराव की चेतावनी
पार्टी के इस कदम पर अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए ममता मीना ने एक बड़ी राजनीतिक भविष्यवाणी भी कर दी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर वरिष्ठ नेताओं की इसी तरह अनदेखी होती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब भाजपा का हश्र भी कांग्रेस जैसा होगा। उन्होंने अंदेशा जताया कि अंदरूनी असंतोष के चलते राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा दो धड़ों में बंट सकती है। फिलहाल, नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया की सड़कों पर उनके समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है, जिससे आगामी उपचुनाव में भाजपा की राह आसान नहीं दिख रही है।

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