गुना।
मध्य प्रदेश सरकार ने देश के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा उलटफेर करते हुए राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया है। सरकार ने 4 जुलाई 2026 को राजपत्र में अधिसूचना जारी कर देश में पहली बार वक्फ बोर्ड में दो हिंदू (गैर-मुस्लिम) सदस्यों की नियुक्ति की है, जिसमें सबसे चौंकाने वाला नाम गुना जिले के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव का सामने आया है। इस नियुक्ति के सीधे राजनीतिक मायने इसलिए निकाले जा रहे हैं क्योंकि अनिमेष भार्गव के पिता अशोक भार्गव, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साल 1975 से सबसे करीबी और परम मित्रों में गिने जाते हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि से इतर जाकर अनिमेष ने राष्ट्रवाद और भाजपा की राह चुनी।
मैनेजर की नौकरी छोड़ संगठन को समर्पित
अनिमेष भार्गव का यह सफर आसान नहीं रहा है। एमबीए (फाइनेंस) की उच्च शिक्षा प्राप्त अनिमेष को फाइनेंस और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने का करीब 18 वर्षों का लंबा अनुभव है। लगभग एक दशक पहले उन्होंने एचडीएफसी बैंक में मैनेजर पद की अपनी शानदार नौकरी को लात मार दी थी। वे अपनी पत्नी के साथ भोपाल शिफ्ट हो गए और बिना किसी स्वार्थ के बीजेपी प्रदेश कार्यालय में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में रीढ़ की हड्डी बन गए। सुबह से देर रात तक पार्टी की व्यवस्थाएं संभालना ही उनकी दिनचर्या रही है।
वक्फ संशोधन लागू करने वाला पहला राज्य
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के कड़े प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। पहले के नियमों (अधिनियम-1995) के तहत बोर्ड में केवल मुस्लिम सदस्य ही हो सकते थे, लेकिन नए नियमों के तहत कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का होना अनिवार्य कर दिया गया है।