गुना में अजीब वाक्या! आग लगने के बावजूद सुरक्षित खड़ा रहा रावण, लाख कोशिश के बाद भी नहीं हुआ टस से मस
गुना।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व गुना के दशहरा मैदान में उत्साह के साथ आयोजित हुआ, लेकिन इस बार का आयोजन एक अविस्मरणीय और चमत्कार-सा दृश्य लेकर आया जिसने देखने वालों को हैरत में डाल दिया। दरअसल, परंपरा के अनुसार, ठीक रात 9 बजे भगवान राम ने अपने धनुष से जैसे ही अग्निबाण छोड़ा, 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले में भयानक आग लगनी शुरू हो गई और वह धू-धू कर जलने लगा। लोगों ने सोचा कि कुछ ही मिनटों में अहंकार का प्रतीक दशानन राख हो जाएगा, मगर हुआ इसके ठीक विपरीत। आग लगने के करीब 10 मिनट बाद भी जब दशानन का पुतला सुरक्षित और लगभग बिना जला हुआ दिखाई दिया, तो देखने वाले लोग अचंभित हो गए। इतनी भीषण आग और विस्फोटक आतिशबाजी के बावजूद पुतले का जरा भी नक्शा न बिगड़ने का यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं लग रहा था। क्योंकि इससे पहले कम से कम गुना में ऐसा घटनाक्रम आज तक नहीं देखा गया था। मैदान में मौजूद हजारों लोग इस अद्भुत घटना को देखकर हैरान थे। कुछ लोगों ने इसे 'रावण की माया' बताया, तो कुछ ने इसे अशुभ संकेत माना और चर्चा की कि इस बार बुराई का अंत होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। इसी बीच, पूरा दशहरा मैदान 'जय सियाराम' के जयकारों से गूंज उठा। आखिरकार, नगर पालिका की टीम को हस्तक्षेप करना पड़ा। टीम ने पुतले के पैरों से आग को ऊपर तक पहुंचाया, तब जाकर अहंकारी रावण का पूरी तरह से दहन हुआ। यह पहली बार हुआ है जब इतनी विस्फोटक आतिशबाजी के बावजूद रावण का पुतला इतनी देर तक अडिग खड़ा रहा। यह घटना गुना के दशहरा पर्व को हमेशा के लिए यादगार बना गई है।

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