केपी के लंच में मोहन.... सिंधिया के मैदान में सज रहा नया अखाड़ा, लंच डिप्लोमैसी या कुछ और
भोपाल।
गुना लोकसभा सीट से लोकसभा का टिकट काट दिए जाने के बाद से बीजेपी में हाशिए पर चल रहे बीजेपी के पूर्व सांसद केपी यादव को क्या किनारा मिल रहा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की टेरिटरी कहे जाने वाले अशोकनगर में केपी यादव ने अपने पिता रघुवीर सिंह यादव की प्रतिमा के अनावरण पर जो आयोजन किया. इसके बाद सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ केपी यादव की भोजन की तस्वीरों को पॉवर पिक्चर की तरह पेश किया जा रहा है. सियासी हल्के में इस पूरे आयोजन को शक्ति प्रदर्शन बताया जा रहा है. केपी यादव की वो हुंकार जिसमें वो, हम भी हैं के अंदाज में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, इस आयोजन के 48 घंटे बाद अशोकनगर जिले की बीजेपी की कार्यकारिणी की सूची सारी कहानी कह देती है. 18 पदाधिकारियों की सूची में 4 नाम सिंधिया खेमे से हैं.
सिंधिया के मैदान में पॉलिटिक्स की पावर पिक्चर
अशोकनगर में बीजेपी के पूर्व सांसद केपी यादव का अपने पिता रघुवीर सिंह यादव की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम था. मंच पर सीएम डॉ मोहन यादव की मौजूदगी तो थी. लेकिन इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की गैर मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही और ज्यादा चर्चा में रही वो तस्वीर जिसमें सीएम डॉ. मोहन यादव और पूर्व सांसद केपी यादव एक साथ लंच करते दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर के सियासी गलियारों में मायने निकाले जा रहे हैं कि केपी यादव ने इस आयोजन और तस्वीर के जरिए पार्टी में अपना वजूद और ताकत दिखाई है. आयोजन के साथ खास उस तस्वीर के चर्चे में हैं. जिसमें केपी यादव मोहन यादव के बगलगीर लंच की टेबल पर बैठे दिखाई देते हैं. इस तस्वीर के साथ सवाल उठने लगे कि क्या केपी यादव की बीजेपी की मुख्यधारा में आने की जुगत अब काम कर जाएगी. क्या उन्होंने री लांच की सही राह थाम ली है.
कार्यक्रम में सिंधिया की गैरमौजूदगी की भी चर्चा
अशोकनगर के मुंगावली के गांव रसुल्ला में हुए इस बड़े आयोजन में बीजेपी के सिरोंज से विधायक उमाकांत शर्मा पहुंचे थे. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की तो विशिष्ट उपस्थिति थी ही. लेकिन केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की अपने ही इलाके में गैर मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही. जिससे ये स्पष्ट हो गया कि केपी यादव और सिंधिया के बीच की बर्फ पिघली नहीं है. 3 साल पहले केपी यादव ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखकर इस बात की शिकायत की थी कि उनके ही क्षेत्र में सांसद रहते हुए उनकी उपेक्षा की जा रही है. पार्टी के ही सिंधिया समर्थक नेता और मंत्री उन्हें कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं करते. प्रोटोकॉल के मुताबिक लोकार्पण कार्यक्रमों में जो पत्थर लगता है उसमें भी उनका नाम नहीं होता.
2019 से जारी है सिंधिया केपी यादव का शीत युद्ध
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने केपी यादव को ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुकाबले गुना लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था और सिंधिया ये चुनाव हार गए थे. सिंधिया के लिए ये इतना गहरा ज़ख्म था कि उन्होंने इसके बाद पार्टी बदलने में देर नहीं की लेकिन सांसद जरूर बनें. 2024 में सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद केपी यादव का पत्ता कट गया और गुना सीट से पार्टी ने उनके बजाए ज्योतिरादित्य सिंधिया को टिकट दे दिया. सिंधिया के समर्थकों के साथ बीजेपी में आ जाने के बाद से केपी यादव अपनी ही पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
अशोकनगर जिला बीजेपी में सिंधिया के 4 समर्थक केपी का एक भी नहीं
अशोकनगर जिले में बीजेपी ने अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी है. 7 उपाध्यक्ष, 2 महामंत्री, 7 मंत्रियों, कोषाध्यक्ष और सह कोषाध्यक्ष की 18 सदस्यीय कार्यकारिणी में 4 सिंधिया समर्थकों को जगह मिली है. जबकि केपी यादव के समर्थन का एक नाम भी नहीं है.

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