मुंबई में धमकी देकर बुजुर्ग को बनाया शिकार, लाखों की साइबर ठगी
मुंबई: रिटायर बैंक मैनेजर के साथ 40.90 लाख की डिजिटल ठगी, एटीएस अधिकारी बनकर ठगों ने 54 दिनों तक घर में रखा कैद
मुंबई के भांडुप क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की चपत लगाई है। ठगों ने स्वयं को एटीएस और एनआईए का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित को दिल्ली में हुए बम धमाकों और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी। इस गिरोह ने पीड़ित को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उन्हें पूरे 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया, जिसका अर्थ है कि उन्हें घर के एक कमरे में कैद रहकर हर पल कैमरे के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज करानी पड़ती थी। इस लंबी अवधि के दौरान ठगों ने किस्तों में पीड़ित से कुल 40.90 लाख रुपये ऐंठ लिए, जिसके बाद अब मुंबई की साइबर सेल ने इस जटिल मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
फर्जी जांच और सुप्रीम कोर्ट के जाली दस्तावेजों से पैदा किया खौफ
ठगी के शिकार 61 वर्षीय राजेंद्र तुकाराम सुर्वे को मार्च माह में एक कॉल आया था, जिसमें सामने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बताया। जालसाजों ने पीड़ित को यह विश्वास दिला दिया कि उनके पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर कर्नाटक में एक संदिग्ध बैंक खाता खोला गया है, जिसके जरिए करोड़ों का अवैध लेन-देन हुआ है। सुर्वे को डराने के लिए ठगों ने न केवल पुलिसिया वर्दी का इस्तेमाल किया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों की प्रति भी दिखाई, जिससे एक बैंक मैनेजर के रूप में कार्य कर चुके सुर्वे भी झांसे में आ गए। उन्हें मजबूर किया गया कि वे किसी भी बाहरी व्यक्ति या परिवार के सदस्य से इस 'गोपनीय जांच' के बारे में चर्चा न करें, वरना उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।
शेयर बेचकर और पत्नी के नाम पर लोन लेकर चुकाई ठगी की रकम
ठगों की मांगें समय के साथ बढ़ती गईं और उन्होंने पीड़ित को मानसिक रूप से इस कदर विवश कर दिया कि सुर्वे ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी उनके हवाले कर दी। पहले चरण में करीब तीन लाख रुपये लेने के बाद ठगों ने उन पर शेयर बाजार में निवेश किए गए अपने 29 लाख रुपये के शेयर बेचने का दबाव बनाया, जिसकी पूरी राशि अपराधियों के बताए खातों में हस्तांतरित कर दी गई। क्रूरता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब ठगों ने जमानत की सुरक्षा निधि के नाम पर 10 लाख रुपये और मांगे, जिसे चुकाने के लिए पीड़ित की पत्नी को बैंक से कर्ज लेना पड़ा। ठगों ने यह झूठा आश्वासन दिया था कि जांच प्रक्रिया पूर्ण होते ही उनकी पूरी राशि ससम्मान वापस कर दी जाएगी।
संपर्क टूटने पर हुआ धोखाधड़ी का अहसास और पुलिस की कार्रवाई
जैसे ही ठगों के पास बड़ी रकम पहुँच गई, उन्होंने सुर्वे के साथ सभी संचार माध्यमों को बंद कर दिया और उनके नंबर ब्लॉक कर दिए। कई दिनों के इंतजार के बाद जब कोई पैसा वापस नहीं आया, तब पीड़ित को समझ आया कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने मई माह में औपचारिक रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अब साइबर सेल उन बैंक खातों और डिजिटल हस्ताक्षरों की पड़ताल कर रही है जिनका उपयोग इस ठगी में हुआ है। पुलिस ने नागरिकों को सचेत किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल के जरिए किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है, इसलिए ऐसे संदिग्ध कॉल्स आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए।

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