नए रंग में धार की भोजशाला: कोर्ट के आदेश के बाद पहले मंगलवार को उमड़ा आस्था का सैलाब, बांटी गई मिठाई
धार।
मंगलवार की सुबह जब सूरज की पहली किरण धार की धरती पर पड़ी, तो हवाओं में शंखनाद गूंज उठा। केसरिया और पीले वस्त्रों में सजे श्रद्धालुओं का हुजूम उन गलियारों की तरफ बढ़ रहा था, जो दशकों से एक अनसुलझे विवाद के सन्नाटे में डूबे थे। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा साल 2003 के एएसआई के आदेश को खारिज करने और इस स्थल को मंदिर और शिक्षा का केंद्र घोषित करने के बाद, यह पहला मंगलवार था जब भोजशाला प्रार्थना और आस्था से जीवंत हो उठी।
कड़े पहरे के बीच हनुमान चालीसा और सरस्वती वंदना का पाठ
सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच, परिसर के चारों ओर टेंट की दीवारें खड़ी कर श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित रास्ता बनाया गया था। प्राचीन गलियारों के भीतर, पुजारियों ने वाग्देवी (मां सरस्वती) की एक थ्री-डी कार्डबोर्ड तस्वीर के सामने संस्कृत श्लोकों का पाठ किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा और सरस्वती वंदना की। परिसर में बच्चों की कतारें अपने गुरुओं के साथ संस्कृत के छंद पढ़ती नजर आईं, और दर्शन कर लौट रहे लोगों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। श्रद्धालुओं ने इस पल को सत्य की जीत और दशकों के संघर्ष के बाद आई दीवाली जैसा बताया।
ब्रिटिश म्यूजियम से वाग्देवी की मूल मूर्ति लाने की मांग तेज
धार में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के अध्यक्ष आशीष गोयल ने बताया कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब मूल वाग्देवी प्रतिमा को वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को प्रतिवेदन भेजे गए हैं। यह मूर्ति औपनिवेशिक काल के दौरान ब्रिटिश म्यूजियम ले जाई गई थी। इसके साथ ही, साल 2024 में एएसआई के सर्वे के दौरान परिसर से मिलीं शिव, विष्णु और महिषासुर मर्दिनी सहित 90 से अधिक मूर्तियों को भी वापस उसी स्थान पर स्थापित करने की मांग उठने लगी है।

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