धार में शिक्षा का मंदिर शर्मसार: रंगीन मिजाज प्रिंसिपल की हरकतों से तंग शिक्षिका ने रोते हुए मांगी 'मौत', विधायक के सामने फूटा दर्द!
धार।
मध्य प्रदेश के धार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक प्रतिष्ठित सीएम राइज सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर महिला शिक्षिकाओं ने शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला इतना बढ़ गया कि एक शिक्षिका ने भाजपा विधायक नीना वर्मा के सामने हाथ जोड़कर रोते हुए यहाँ तक कह दिया— "मुझे इस स्कूल से हटा दो, वरना मैं सुसाइड कर लूंगी!"
विधायक के सामने फूट-फूटकर रोईं मेघना शर्मा
बीते दिन स्कूल में साइकिल वितरण का कार्यक्रम था, जहाँ भाजपा विधायक नीना वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। इसी दौरान शिक्षिका मेघना शर्मा अपना आपा खो बैठीं और फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राचार्य डॉ. एस.आर. मिश्रा उन्हें जानबूझकर नोटिस देकर प्रताड़ित कर रहे हैं और उनकी नीयत ठीक नहीं है। विधायक ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया और मामले की जांच का आश्वासन दिया।
"अकेले में बुलाते हैं और फिजिकल होने की कोशिश करते हैं"
खबर सिर्फ एक शिक्षिका तक सीमित नहीं है। स्कूल की एक अन्य शिक्षिका रूपाली नायक ने कैमरे के सामने प्राचार्य की 'रंगीन मिजाजी' की पोल खोल दी। उन्होंने आरोप लगाया कि: प्राचार्य उन्हें बार-बार अकेले ऑफिस या स्टाफ रूम में बुलाते थे। मैसेजेस के जरिए उनकी सुंदरता की तारीफ करते थे। मना करने पर या जवाब न देने पर प्रताड़ित करते थे। यहाँ तक कि एक बार प्राचार्य ने उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश भी की, जिसका विरोध करने पर उन्हें सस्पेंड करने की धमकी दी गई।
प्राचार्य का बचाव: 'ये नोटिस से बचने का बहाना है'
वहीं, आरोपी प्राचार्य डॉ. एस.आर. मिश्रा ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका तर्क है कि शिक्षिका मेघना शर्मा को पिछले साल साइकिल वितरण में हुई लापरवाही के लिए 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया है, जिससे बचने के लिए वे इस तरह के झूठे आरोप लगा रही हैं। हालांकि, स्कूल के स्टाफ द्वारा प्राचार्य के खिलाफ की गई नारेबाजी (मुर्दाबाद के नारे) कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
2016 में भी हुई थी जांच, फिर भी बच निकले!
हैरानी की बात यह है कि प्राचार्य मिश्रा पर इस तरह के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 2016 में भी उनकी ऐसी ही हरकतों की जांच हुई थी और तत्कालीन कलेक्टर ने उन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन रसूख के चलते वे अब तक बचते रहे।
बड़ा सवाल: क्या यही है शिक्षा का भविष्य?
एक तरफ सरकार सीएम राइज स्कूलों को प्रदेश का मॉडल बता रही है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षक और प्राचार्य के बीच चल रहे इस "गंदे खेल" को बच्चे देख रहे हैं। जब स्कूल की महिला सुरक्षित नहीं हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता का क्या होगा? अब गेंद सरकार और प्रशासन के पाले में है। क्या इन महिला शिक्षकों को न्याय मिलेगा या रसूखदार प्राचार्य एक बार फिर बच निकलेगा? 4 मई और आने वाले दिनों की जांच इस मामले की दिशा तय करेगी।

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