दतिया उपचुनाव में नया सियासी भूचाल: कांग्रेस के मंच पर पूर्व डकैत मलखान सिंह की एंट्री, शिवराज बोले—'यही है कांग्रेस का असली चेहरा'
दतिया।
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार के बीच एक तस्वीर ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चंबल के पूर्व बागी रहे मलखान सिंह कांग्रेस के चुनावी मंच पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ दिखाई दिए। मंच से उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के समर्थन में लोगों से मतदान की अपील की। तस्वीरें सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है।
दतिया के कमरारी गांव में आयोजित कांग्रेस की आमसभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश सह-प्रभारी संजना जाटव के साथ पूर्व बागी मलखान सिंह मंच पर मौजूद रहे। सभा के दौरान उन्होंने माइक संभालते हुए कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील की। कार्यक्रम की तस्वीरें जीतू पटवारी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा कि कमरारी की जनसभा में कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद हुआ तथा सभी ने कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक समय दतिया से लेकर शिवपुरी तक का इलाका डकैतों के खौफ से प्रभावित था और लोग शाम ढलने के बाद घरों से निकलने से डरते थे। शिवराज ने दावा किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी सरकार ने डकैतों के खिलाफ सख्त अभियान चलाकर चंबल क्षेत्र को इस भय से मुक्त कराया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि डकैतों को संरक्षण देना उसकी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा रहा है।
कौन हैं मलखान सिंह?
मलखान सिंह चंबल अंचल के चर्चित पूर्व बागियों में गिने जाते रहे हैं। उनका संबंध मध्य प्रदेश के भिंड जिले से है और 1970-80 के दशक में उनका नाम चंबल के बड़े दस्यु गिरोहों में लिया जाता था। वर्ष 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में उन्होंने अपने साथियों सहित आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उन्होंने मुख्यधारा का रास्ता अपनाया और समय-समय पर सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। दतिया उपचुनाव के बीच कांग्रेस के मंच पर उनकी मौजूदगी ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया है। अब यह मुद्दा केवल चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद चुनावी रणनीति और जनमत पर कितना असर डालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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