दतिया में सिर्फ 10 हजार वोटों का खेल: पिछले 15 साल के आंकड़े गवाह, जरा सा चूके तो बदल जाता है हार-जीत का सिकंदर
दतिया।
दतिया विधानसभा का चुनावी इतिहास बताता है कि पिछले 15 वर्षों में यहां राजनीतिक मुकाबले का स्वरूप लगातार बदला है। वर्ष 2008 से 2018 तक भाजपा ने लगातार तीन चुनाव जीते, लेकिन 2023 में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर इस क्रम को तोड़ दिया। चुनावी आंकड़े बताते हैं कि भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला हर चुनाव में और अधिक कड़ा होता गया। पिछले चार विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो 2008 से 2018 तक भाजपा ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की। हालांकि, हर चुनाव के साथ कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ता गया। 2018 में मुकाबला बेहद कांटे का रहा और 2023 में कांग्रेस ने भाजपा का 15 साल पुराना विजय अभियान रोक दिया। यही वजह है कि इस बार उपचुनाव में भी दोनों दलों के बीच कड़ी टक्कर की संभावना जताई जा रही है।
2008: भाजपा को मिली बढ़त, बसपा रही दूसरे स्थान पर
2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने 34,489 वोट (34.10%) हासिल कर जीत दर्ज की। उस समय बसपा मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही। बसपा के राजेंद्र भारती को 23,256 वोट (22.99%), जबकि कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 19,209 वोट (18.99%) मिले। भाजपा ने यह चुनाव 11,233 वोटों के अंतर से जीता।
2013: कांग्रेस ने बढ़ाई चुनौती
2013 में मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमट गया। भाजपा उम्मीदवार डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 57,438 वोट (44.16%) मिले, जबकि कांग्रेस के राजेंद्र भारती को 45,357 वोट (34.87%) प्राप्त हुए। बसपा के कालीचरण कुशवाह को 20,191 वोट (15.52%) मिले। भाजपा ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करते हुए 12,081 वोटों की बढ़त बनाई।
2018: जीत का अंतर सिमटा
2018 का चुनाव बेहद करीबी रहा। भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 72,209 वोट (49%) मिले, जबकि कांग्रेस के राजेंद्र भारती को 69,553 वोट (47.2%) मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर केवल 2,656 वोट रहा। इससे स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस ने इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी।
2023: बदला चुनावी समीकरण
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा का लगातार तीन चुनावों का विजय अभियान रोक दिया। कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से पराजित किया। इस परिणाम के साथ दतिया विधानसभा में 15 साल बाद सत्ता का समीकरण बदल गया।
उपचुनाव में क्यों अहम है 10 हजार वोट?
पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि दतिया में जीत-हार का अंतर कभी 12 हजार वोट रहा तो कभी सिर्फ 2,656 वोट। 2023 में कांग्रेस ने 7,742 वोटों से जीत दर्ज की। ऐसे में यदि करीब 10 हजार मतदाताओं का रुझान किसी एक दल की ओर बदलता है तो पूरा चुनावी परिणाम बदल सकता है। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें उन क्षेत्रों पर हैं, जहां पिछले चुनाव में कम अंतर से जीत-हार हुई थी।
2.20 लाख मतदाता करेंगे फैसला
दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार 2,20,344 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1,16,088 पुरुष, 1,04,246 महिला और 10 अन्य मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा 1,372 दिव्यांग, 1,237 वरिष्ठ नागरिक और 443 सर्विस वोटर भी चुनाव परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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