दतिया शूटआउट: 11 साल की रंजिश और फिल्मी अंदाज में कत्ल, क्या सोई रही पुलिस?
दतिया।
मध्य प्रदेश के दतिया जिले में रविवार को एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया। बीजेपी पार्षद की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात महज एक अपराध नहीं, बल्कि 11 साल से सुलग रही बदले की आग का खौफनाक नतीजा मानी जा रही है। हमलावरों ने इस हत्याकांड के लिए 31 मार्च की तारीख को एक विशेष डेडलाइन के तौर पर चुना था, जो इस साजिश को और भी अधिक फिल्मी और खौफनाक बनाता है।
11 साल पुरानी थी रंजिश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक पार्षद और आरोपी पक्ष के बीच साल 2013 से रंजिश चली आ रही थी। बताया जा रहा है कि 11 साल पहले इसी तारीख के आसपास एक हत्या हुई थी, जिसका बदला लेने के लिए हमलावर लंबे समय से ताक में थे। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावरों ने पार्षद को घेरकर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।
सोची-समझी साजिश?
सूत्रों का दावा है कि इस हत्याकांड की पटकथा पहले ही लिख दी गई थी। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में '31 मार्च' को लेकर पहले से ही कुछ अंदेशे जताए जा रहे थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या हमलावरों ने इस तारीख को किसी प्रतीकात्मक बदले के तौर पर इस्तेमाल किया है।
क्या पुलिस से हुई चूक?
दतिया मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का गढ़ रहा है। हालांकि वो अपना पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। पहले भी यहां से कई खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में बीजेपी पार्षद की हत्या कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग के दावों की पोल खोलती है। यह घटना दर्शाती है कि चंबल-ग्वालियर अंचल के कुछ हिस्सों में आज भी खून के बदले खून की मानसिकता प्रशासनिक डर पर हावी है।

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