'संत' अवतार में नजर आए दमोह कलेक्टर: मीटिंग में रामचरितमानस की चौपाइयों से अधिकारियों को सिखाई जीवन की सीख
दमोह।
जो अफसर अपनी सादगी और आम जनता के सामने सारे प्रोटोकॉल तोड़कर पैर छूने के लिए जाना जाता है, उसने जब कलेक्ट्रेट सभागार में माइक संभाला तो नजारा ही बदल गया। समीक्षा बैठक में अचानक 'संत' अवतार में नजर आए दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अधिकारियों से एक अनोखा सवाल पूछा और फिर रामचरितमानस के दोहों से 'सुमति' की क्लास लगा दी। बैठक में कुछ समय के लिए माहौल ऐसा बना मानो कोई मीटिंग नहीं, बल्कि अध्यात्म की कथा चल रही हो
कलेक्टोरेट भागार में आयोजित अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान उस वक्त एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब बैठक ले रहे कलेक्टर प्रताप नारायण यादव अचानक प्रशासनिक तेवरों को छोड़कर अध्यात्म और जीवन-दर्शन की बातें करने लगे। अधिकारियों को कड़े प्रशासनिक निर्देश देने के बजाय DM साहब ने गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखित व रामचरितमानस की चौपाइयां और दोहे सुनाना शुरू कर दिया।
बैठक में मौजूद जिले भर के अधिकारी-कर्मचारी कुछ देर के लिए हैरान रह गए। सभागार में सन्नाटा पसर गया और माहौल ऐसा बन गया मानो अधिकारी किसी कलेक्टोरेट की मीटिंग में नहीं, बल्कि किसी धार्मिक पंडाल में कथा और प्रवचन सुन रहे हों।
पूछा सवाल- 'मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र कौन है?'
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने समीक्षा बैठक के बीच में अचानक अधिकारियों से एक सवाल पूछा कि, 'मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र कौन है, जो उसके साथ हर परिस्थिति में हमेशा रहता है?'
डीएम ने श्री रामचरितमानस की चौपाई सुनाई
सभागार में मौजूद अधिकारी जब इसका उत्तर सोचने लगे, तब कलेक्टर ने स्वयं रामचरितमानस की चौपाई 'जहां सुमति तहं संपत्ति नाना, जहां कुमति तहं विपत्ति निदाना' का उल्लेख करते हुए इसे सहज भाव से समझाया। उन्होंने कहा कि 'सुमति' का सीधा अर्थ 'सद्विवेक' है। जहां विवेक और सही दृष्टि है, वहां संपत्ति, सिद्धि और समृद्धि अपने आप खिंची चली आती है। मनुष्य का सच्चा मित्र उसका अपना विवेक ही है।
प्रशासनिक सख्ती के साथ सादगी और सहजता की पहचान
मूल रूप से बुंदेलखंड अंचल के रहने वाले कलेक्टर प्रताप नारायण यादव अपनी बेहद सहज, सरल और जमीन से जुड़ी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। एक ओर जहां वे शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त फैसले लेने में नहीं हिचकिचाते, वहीं जनहितैषी कार्यों और आम जनता से संवाद में सारे प्रोटोकॉल किनारे कर देते हैं।

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