नई दिल्ली/छतरपुर।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी 'केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना' एक बार फिर विवादों के केंद्र में है।  सबकी खबर के साथ सामाजिक कार्यकर्ता अ​मित भटनागर के साथ हुए एक पॉडकॉस्ट में इस परियोजना के उन पहलुओं को उजागर किया है, जो पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर, जो लंबे समय से विस्थापित आदिवासियों और गरीबों की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्होंने इस परियोजना से होने वाले नुकसान का चौंकाने वाला ब्यौरा दिया है। परियोजना के कारण 46 लाख पेड़ (29 प्रजातियों के) काट दिए जाएंगे। 129 प्रजातियों के पक्षियों के घर उजड़ेंगे और 29 तरह की मछलियों का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा। यहाँ सात प्रजातियों के गिद्ध प्रजनन करते हैं, जिनका प्राकृतिक आवास पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। केन घड़ियाल अभयारण्य यह महत्वपूर्ण अभयारण्य भी इस परियोजना की भेंट चढ़ सकता है। पाषाण कालीन अमूल्य शैल चित्र हमेशा के लिए जलमग्न हो जाएंगे।
"अविवेकपूर्ण है पानी का बहाव"
भटनागर ने वैज्ञानिक तर्क देते हुए बताया कि केन नदी समुद्र तल से 500 मीटर की ऊंचाई पर बहती है, जबकि बेतवा नदी 567 मीटर की ऊंचाई पर। एक नीचे बहती नदी के पानी को ऊपर की ओर ले जाने का प्रयास प्राकृतिक और तकनीकी रूप से अविवेकपूर्ण है।
अदालती आदेशों और नियमों की अनदेखी
भटनागर का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 'सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी' ने अपनी रिपोर्ट में इस परियोजना को "भयंकर विनाशकारी" बताया है और इसे रोकने की सिफारिश की है। मामला फिलहाल एनजीटी (NGT) और सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, फिर भी सरकार इसे लागू करने में जल्दबाजी दिखा रही है।
44,000 करोड़ का बेहतर विकल्प: 22 लाख तालाब
परियोजना की भारी-भरकम लागत (₹44,605 करोड़) पर सवाल उठाते हुए भटनागर ने एक वैकल्पिक मॉडल पेश किया: इस राशि से पूरे बुंदेलखंड में 22 लाख तालाब बनाए जा सकते हैं।
इससे 1.10 करोड़ हेक्टेयर जमीन सिंचित हो सकती है। सरकार की वर्तमान योजना महज 10,000 हेक्टेयर (दावे के अनुसार) सिंचित करने की बात कर रही है। अमित भटनागर का मानना है कि बुंदेलखंड के जल संकट का असली समाधान चंदेल कालीन तालाबों और कुओं के पुनरुद्धार में है, न कि अरबों रुपए खर्च कर पर्यावरण को तबाह करने वाली बड़ी परियोजनाओं में।

  • "22 गांव पूरी तरह डूब जाएंगे। आदिवासियों और किसानों के मुआवजे के नाम पर अधिकारी और दलाल सक्रिय हैं, जहाँ करोड़ों का भ्रष्टाचार हो रहा है।"
    - अमित भटनागर