"आंदोलन भटक गया, लेकिन छात्रों की बात सरकार को सुननी होगी" — रघुनंदन शर्मा का बड़ा बयान
नई दिल्ली/भोपाल, सबकी खबर।
देशभर में युवाओं के आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब कई राज्यों तक फैल चुका है। आंदोलन का केंद्र प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों का आक्रोश है। इसी मुद्दे पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे रघुनंदन शर्मा से सबकी खबर के साथ हुई एक विशेष बातचीत में कई महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा हुई। रघुनंदन शर्मा ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत छात्रों की वास्तविक समस्याओं को लेकर हुई थी, लेकिन समय के साथ इसमें ऐसे तत्व शामिल हो गए जिन्होंने इसकी दिशा बदल दी। उनके अनुसार, यदि आंदोलन पूरी तरह छात्रों के हितों तक सीमित रहता तो उसका उद्देश्य अधिक प्रभावी होता, जबकि अब इसमें राजनीतिक और अन्य समूहों की सक्रियता बढ़ गई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा कि केवल नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। उनका कहना था कि यदि पेपर लीक में कोई व्यक्ति या गिरोह शामिल है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और पत्रकारों पर हमलों की उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निंदा की। शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों का सम्मान होना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में उनके साथ हिंसा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों का दायित्व निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करना है तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। मीडिया की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पत्रकारों को जनहित, लोकतंत्र और राष्ट्रहित के मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि मीडिया को समाज के वास्तविक मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए। सरकार की भूमिका पर उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी जायज़ मांगों पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई भी होनी चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में संवाद सबसे प्रभावी समाधान है और सरकार को छात्रों से बातचीत के रास्ते खुले रखने चाहिए। छात्रों के लिए संदेश देते हुए रघुनंदन शर्मा ने अपील की कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखें तथा किसी भी ऐसे तत्व से दूरी बनाए रखें जो आंदोलन को हिंसक या भटकाने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि अपनी बात रखना हर नागरिक और छात्र का लोकतांत्रिक अधिकार है। यह आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा, यह सरकार, छात्रों और राजनीतिक दलों के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि छात्रों की वास्तविक चिंताओं का समाधान संवाद और पारदर्शी कार्रवाई के माध्यम से निकाला जाए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बना रहे।

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