"भर्ती बंद, हॉस्टल बदहाल और शिक्षा का निजीकरण... युवाओं की बात नहीं सुनना चाहती सरकार": उमंग सिंघार
भोपाल।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बुधवार को मुख्यमंत्री निवास के सामने स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति छात्रावास पहुंचे और वहां रह रहे छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर युवाओं और छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को "युवा वर्ष" तो घोषित कर दिया, लेकिन युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विधानसभा से लेकर जमीन तक चर्चा करने से बच रही है। सिंघार ने कहा कि प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक, बेरोजगारी, छात्रवृत्ति, छात्रावासों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार जवाब देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल अपनी बात सुनाना चाहती है, जबकि छात्रों और युवाओं की समस्याओं पर संवाद करने से कतरा रही है।
शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के लिए पहले बैंक गारंटी की अनिवार्यता थी, लेकिन अब उसमें भी ढील दी जा रही है। इससे निजी संस्थानों को लाभ मिलेगा, जबकि सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जाएगी। उनका कहना था कि सरकार नए शिक्षकों की भर्ती करने के बजाय निजी संस्थानों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है।
सरकारी स्कूल और हॉस्टलों की हालत बिगड़ रही
सिंघार ने कहा कि प्रदेश में हजारों शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार भर्ती नहीं कर रही। दूसरी ओर सरकारी स्कूलों और छात्रावासों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीब और ग्रामीण परिवारों के छात्र निजी शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए।
'लाठी नहीं, सुविधाएं चाहिए'
उन्होंने कहा कि छात्र केवल मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। वे बेहतर शिक्षा, सुरक्षित छात्रावास और सामान्य सुविधाएं चाहते हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाय आंदोलन करने पर कार्रवाई कर रही है। सिंघार ने आरोप लगाया कि हाल के छात्र आंदोलनों में पुलिस का रवैया भी छात्रों के प्रति कठोर रहा।
छात्रों का आरोप- हॉस्टल खाली कराने की तैयारी
छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रावास की मरम्मत कराने के बजाय उसे खाली कराना चाहती है। उनका कहना है कि करीब दो वर्ष पहले भवन को बिना समुचित तकनीकी परीक्षण के जर्जर घोषित कर दिया गया था। बाद में उस रिपोर्ट पर सवाल भी उठे, लेकिन नई इमारत बनाने के बजाय छात्रों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। छात्रों ने मांग की कि मौजूदा परिसर की खाली जमीन पर नया छात्रावास बनाया जाए।
तीन साल से सिर्फ आश्वासन मिलने का आरोप
छात्रों ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, कलेक्टर, संभागायुक्त सहित कई अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार बजट का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है। उनका आरोप है कि छात्रावास के रखरखाव के लिए मिलने वाली राशि का भी सही उपयोग नहीं किया गया।
टॉयलेट बदहाल, पानी और भोजन की भी समस्या
छात्रों ने बताया कि छात्रावास के कई शौचालय बंद पड़े हैं और कुछ की हालत इतनी खराब है कि उनमें पेड़-पौधे उग आए हैं। पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं होती, जिससे स्वच्छ पेयजल की समस्या बनी रहती है। कई बार खुले में नहाने की मजबूरी होती है। छात्रों ने मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए मेस राशि बढ़ाने, साफ पेयजल, लाइब्रेरी, वाई-फाई, कंप्यूटर सुविधा और छात्रावास की क्षमता 50 से बढ़ाकर 150 सीट करने की मांग की।

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