MP में 'एनीमिया मुक्त अभियान' पर भ्रष्टाचार का साया: 50 करोड़ के टेंडर में धांधली का आरोप, EOW पहुंची शिकायत
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के लगभग 9 करोड़ नागरिकों को एनीमिया (खून की कमी) की बीमारी से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए करोड़ों रुपये के बजट पर भ्रष्टाचार और सांठगांठ के गंभीर आरोप लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग और मप्र पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉरपोरेशन द्वारा हीमोग्लोबिन मीटर और क्यूबिट (Quik-Read Cuvette) की खरीद के लिए निकाले गए करीब 50 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसकी शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और लोकायुक्त तक पहुँच गई है। माना जा रहा है कि यह मामला जल्द ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) की दहलीज तक भी पहुँच सकता है।
पसंदीदा वेंडर को फायदा पहुँचाने का खेल!
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश भर में हीमोग्लोबिन की जाँच के लिए लगभग 2,752 मीटर और 8 करोड़ 55 लाख से अधिक क्यूबिट्स की खरीदारी की जानी है। दो महीने पहले निकाले गए पहले टेंडर पर सवाल उठने के बाद अधिकारियों ने उसे निरस्त कर दिया था। दावा किया जा रहा है कि नया टेंडर जारी होने के बावजूद पसंदीदा कंपनी को काम देने की 'सेटिंग' नहीं बदली। आरोप है कि भोपाल की स्थानीय फर्म 'कंथाली ट्रेडर्स' और अहमदाबाद (गुजरात) की 'आदित्य क्लिनिक सिस्टम्स' के गठजोड़ को टेंडर का 75% काम देने और शेष 25% काम एक अन्य पसंदीदा वेंडर (एमके एसोसिएट्स) को देने की रणनीति बनाई गई है।
इंदौर से भोपाल तबादला: डॉ. पंकज पराशर की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे टेंडर प्रक्रिया को अपने मनमाफिक ढालने के लिए महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज, इंदौर से डॉ. पंकज पराशर का रातों-रात भोपाल स्वास्थ्य कॉरपोरेशन में 'टेक्निकल इंचार्ज' के रूप में तबादला किया गया। डॉ. पराशर पर आरोप है कि वे सरकारी सेवा में रहते हुए खुद की निजी कंपनी चला रहे हैं और उपकरण सप्लाई का काम करते हैं। उन्हें केवल इसलिए लाया गया ताकि वे तकनीकी खामियों (Technical Grounds) का बहाना बनाकर प्रतिस्पर्धी कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर सकें।
प्रतिस्पर्धा से बाहर करने के लिए तकनीकी 'पेच'
टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुई मुख्य प्रतिस्पर्धी कंपनी 'आर.के. एक्सचेंज' को बाहर करने के लिए 'लिमिट ऑफ एग्रीमेंट' जैसी अनावश्यक शर्तों का सहारा लिया गया। दूसरी ओर, पसंदीदा कंपनियों (आदित्य क्लिनिक सिस्टम्स और कंथाली ट्रेडर्स) द्वारा पब्लिकेशन और प्रोडक्ट परफॉर्मेंस से जुड़े नियमों के उल्लंघन को कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया।
EOW और लोकायुक्त में शिकायत दर्ज, कोर्ट जाने की तैयारी
मामले में गड़बड़ी के पुख्ता दस्तावेजों के साथ EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। सूत्रों का कहना है कि EOW अगले एक-दो दिनों में संबंधित अधिकारियों और कॉरपोरेशन को नोटिस जारी कर सकता है। यदि टेंडर प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया गया, तो शिकायतकर्ता इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं।
शीर्ष नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकीं निगाहें
स्वास्थ्य विभाग में जारी इस कथित 50 करोड़ रुपये के खेल के बाद अब गेंद प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री (स्वास्थ्य मंत्री) और अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) के पाले में है।

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