भोपाल।
मध्य प्रदेश में 'कागजों पर अस्पताल' और 'फर्जी नियुक्तियों' के बाद अब शिक्षा जगत से जुड़ा एक और बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। इंडिया टुडे की एक इन्वेस्टिगेशन में भोपाल के आसपास संचालित हो रहे बी.एड. कॉलेजों की जमीनी हकीकत और यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड में बड़ा अंतर देखने को मिला है। भविष्य के शिक्षकों को तैयार करने वाले ये संस्थान कागजों में तो चकाचक हैं, लेकिन मौके पर या तो गायब हैं या सालों से बंद पड़े हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला विदिशा रोड पर स्थित मुगालिया कोट गांव का है। बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां खसरा नंबर 148/149/2/1 पर 'श्री राम कॉलेज ऑफ एजुकेशन' संचालित होना चाहिए। लेकिन जब टीम वहां पहुंची, तो क्लासरूम या स्टाफ की जगह एक खाली खेत मिला, जहां गाय और भैंसें चर रही थीं। वहां न तो कोई बिल्डिंग थी और ना ही कोई साइनबोर्ड। इसी जमीन के रिकॉर्ड पर दो और संस्थान, मिलेनियम कॉलेज और बगलामुखी कॉलेज भी दर्ज पाए गए।
125 प्राइवेट कॉलेजों को बिना वेरिफिकेशन के मान्यता क्यों?
इस पूरे मामले ने यूनिवर्सिटी के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के पास कुल 129 बी.एड. कॉलेज हैं, जिनमें 127 प्राइवेट हैं। कार्यकारी परिषद के निर्देश पर हुई जांच में दो कॉलेज अपने पते पर मिले ही नहीं, जबकि कई अन्य में बुनियादी सुविधाएं गायब थीं। इसके बावजूद, 24 जून को हुई बैठक में यूनिवर्सिटी ने फिजिकल वेरिफिकेशन करने के बजाय सिर्फ एक नोटरीकृत हलफनामे के आधार पर 125 प्राइवेट बी.एड. कॉलेजों को सशर्त संबद्धता दे दी।
सरकार और विपक्ष का रुख
इस मामले पर मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने माना कि जांच कमेटी को कई विसंगतियां मिली हैं। उन्होंने कहा, 'शिकायतों के बाद एफिडेविट लेने का फैसला किया गया था। अगर आगामी जांच में इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी या बिल्डिंग में कोई भी कमी पाई जाती है, तो इन संस्थानों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाएगी।'