एक फोन कॉल और 'आनंद' में तब्दील हो गया भारी-भरकम विभाग, जानें मंत्री लखन पटेल पर गाज गिरने की इनसाइड स्टोरी
भोपाल।
मध्य प्रदेश के पशुपालन मंत्री लखन पटेल से उनका विभाग रातों रात ले लिया गया है। अभी तक इसके पीछे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। मगर सियासी गलियारे में एक फोन कॉल की चर्चा है, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। अब लखन पटेल को ऐसा मंत्रालय दिया गया, जिसके बाद वह सिर्फ नाम के मिनिस्टर हैं।
कथित सौदेबाजी की चर्चा
राज्य में बड़ी और स्वावलंबी गोशालाओं के लिए 125 एकड़ जमीन आवंटन के लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने में कथित सौदेबाजी की शिकायत पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल को भारी पड़ गई। यह मोहन सरकार के कार्यकाल का पहला ऐसा मामला है, जहां किसी मंत्री का विभाग इतनी तेजी से बदला गया है।
12 करोड़ बजट वाले विभाग का बनाया गया मंत्री
इस फेरबदल से लखन पटेल के सियासी कद और उनके विभाग का बजट दोनों ही रातों-रात घट गए। जहां पहले उनके पास 2365 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट वाला पशुपालन विभाग था, वहीं अब उन्हें महज 12 करोड़ रुपए के बजट वाले आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन वजहों की भी है चर्चा
वहीं, सीएम मोहन यादव के इस सख्त कदम के पीछे की वजह विभाग में चल रही कई तरह की लापरवाही और सुस्ती मुख्य वजह है। इसमें सबसे अहम राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के 1500 करोड़ रुपए के डेयरी प्रोजेक्ट की सुस्त चाल भी है। सांची दुग्ध संघ सरकार की गारंटी के बावजूद लोन नहीं ले पा रहा था। इसे लेकर सीएम पहले नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। विभाग में कई ऐसे अहम निर्णय थे, जिनमें देरी हो रही थी। इसकी शिकायत दिल्ली तक पहुंची, जिससे सीएम पर दबाव बढ़ गया।
आरएसएस भी नाराज
कथित तौर पर कहा जा रहा है कि गौशालाओं को लेकर आरएसएस भी नाराज थी। आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व तक यह बातें पहुंच रही थी। आरोप हैं कि गोशाला योजना के तहत पात्र संस्थाओं को दरकिनार कर अपात्रों को जमीन दी जा रही थी। यह विवाद भी तूल पकड़ रहा था। इसे लेकर पहले एक अधिकारी को हटाया गया था।
मंत्री को भी नहीं लगी भनक
मंगलवार की देर रात यह कार्रवाई हुई। बताया जा रहा है कि दिल्ली से एक कॉल आने के बाद सारी चीजें पलट गईं। मंत्री लखन पटेल को भी इसकी भनक नहीं थी। कॉल के बाद ही सारी प्रक्रिया की गई। इसके बाद रातों-रात नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। गौरतलब है कि इस मसले पर अभी सरकार से लेकर मंत्री लखन पटेल तक ने चुप्पी साध रखी है। अभी तक किसी की तरफ से कोई सफाई नहीं आई है। ऐसे में तमाम तरह की अटकलें हैं।

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