भोपाल। 
मध्य प्रदेश में आंगनबाड़ी में 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों को मिलने वाले टेक होम राशन की व्यवस्था बदल दी गई है। अब टेक होम राशन की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग संभालेगा। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इधर, भोपाल में 21 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पहले 18 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होगी। बैठक भोपाल जिले के जगदीशपुर (पूर्व नाम इस्लाम नगर) में आयोजित की जाएगी। इसमें समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद इसे विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।
मंत्रियों को दिए तैयारी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक में सभी मंत्रियों से कहा कि वे विधानसभा सत्र के लिए पूरी तैयारी रखें। हर सवाल का तथ्यात्मक जवाब दें, ताकि जनता तक यह संदेश जाए कि सरकार उनके हित में लगातार काम कर रही है।
दृष्टि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म' लॉन्च
कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंचायतों की ऑडिट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाने के लिए 'दृष्टि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म' लॉन्च किया। इसके साथ ही पंचायत दर्पण पोर्टल पर पेमेंट गेटवे सुविधा का भी शुभारंभ किया।
एनआरएलएम के पास थी पहले टेक होम राशन की जिम्मेदारी
आंगनबाड़ी में 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों को मिलने वाले टेक होम राशन की व्यवस्था बदलेगी। अब टेक होम राशन की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग संभालेगा। पहले यह काम राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के जरिए होता था, अब यह व्यवस्था खत्म की जाएगी। अब राशन बनाने और पहुंचाने का काम चयनित स्व-सहायता समूह करेंगे। जो स्व-सहायता समूह अभी राशन बना रहे हैं, वे आगे भी यह काम करते रहेंगे। तैयार राशन आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह बदलाव राशन की गुणवत्ता सुधारने और व्यवस्था बेहतर करने के लिए किया जा रहा है। राशन तैयार करने के लिए स्व-सहायता समूहों के लिए गुणवत्ता के तय नियम बनाए जाएंगे। इन्हीं नियमों के अनुसार राशन तैयार कर पैक किया जाएगा और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा।
योजनाओं की अवधि बढ़ाने का फैसला
कैबिनेट ने कई विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया।
इसमें सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता का प्रस्ताव मंजूर किया गया।
वित्त विभाग की विभिन्न योजनाओं को भी 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई।
जीएसटी से जुड़े फैसले
जीएसटी काउंसिल की सिफारिश पर जीएसटी अपीलीय बोर्ड का गठन किया जाएगा।
जीएसटी से जुड़े विवादों की अपील अब इसी बोर्ड में की जा सकेगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।
दस्तावेजों की संख्या और प्रक्रिया कम होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इससे खासकर एमएसएमई सेक्टर की लिक्विडिटी बेहतर होगी।
इन मुद्दों पर भी लिए गए फैसले
समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीदी के लिए बैंकों को दी गई सरकारी गारंटी की व्यवस्था को जारी रखने का निर्णय लिया गया।
सरकार 'युवा वर्ष 2027' की तैयारी शुरू करेगी।
दिसंबर 2026 तक युवाओं और आम लोगों से सुझाव लिए जाएंगे।
सुझावों के आधार पर वर्ष 2027 में युवाओं के हित में नई योजनाएं और फैसले लागू किए जाएंगे।
बारिश के मौसम में पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा।
इंदौर में 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
दो दिन पहले इंदौर में 1 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं।
अब डिटेल में जानिए टेक होम राशन के बदलाव के बारे में…
अभी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधीन आने वाले राज्य आजीविका मिशन की महिला स्व सहायता समूहों (एसएचजी) के फेडरेशन के हाथों से यह काम कराया जा रहा है और अब महिला एवं बाल विकास विभाग को दिया जा रहा है। इसका कैबिनेट प्रस्ताव चार महीने पहले तैयार हुआ था और एसएचजी को कहा गया था कि वे सिर्फ 31 मार्च 2026 तक का ही टेक होम राशन (टीएचआर) बनाएं। एक अप्रैल से यह काम महिला बाल विकास विभाग कराएगा लेकिन कैबिनेट में प्रस्ताव आने में समय लग गया। मप्र में पोषण आहार का कुल बजट सालाना 1200 करोड़ का है।
महिला और बाल विकास के हाथों में जिम्मेदारी आने के बाद मप्र में टेक होम राशन अब एमपी एग्रो के प्लांटों में तैयार होगा। राज्य में मंडला, सागर, नर्मदापुरम, देवास, धार, रीवा व शिवपुरी सहित 7 सेंटर हैं। होशंगाबाद प्लांट की क्षमता 600 टन व अन्य प्लांटों की 2500 टन है। होशंगाबाद पर 13 करोड़ और बाकी पर 16 करोड़ खर्च हुए, जिसके लिए सरकार ने ग्रांट दी।
नई व्यवस्था लागू हुई तो ये सवाल भी आएंगे
1. महिला स्व सहायता समूहों के प्लांट में 30 से 40 महिलाएं काम कर रही हैं। इनका क्या होगा?
2. प्लांट फेडरेशन चला रहे हैं। यह स्वतंत्र होते हैं। क्या इन्हें महिला बाल विकास को सौंपा जाएगा, वैसे यह नियमानुसार संभव नहीं है।
3. महिला बाल विकास ने पूर्व में एमपी एग्रो से काम कराया। यदि फिर किसी कार्पोरेशन को काम सौंपती हैं तो स्व सहायता समूहों के प्लांट क्या करेंगे।
4. क्या फिर कंपनी-कांट्रेक्टर या बड़े घरानों के पास काम जाएगा।
5. महिला सशक्तिकरण की अवधारणा का क्या होगा?
6. केंद्र सरकार अभी भी औसत 8 रुपए प्रति हितग्राही पैसा दे रही है। खर्च 10 रुपए हो रहा है। भारत सरकार यह राशि नहीं बढ़ाती तो फिर आगे कैसे फायदे वाला काम होगा।
स्व सहायता समूहों से काम वापस लेने ​के पीछे ये 3 बड़े तर्क
मौजूदा सात प्लांट सप्लाई नहीं कर पा रहे। दो-दो महीने बाद पहुंच रहा टेक होम राशन।
सालाना 40-50 करोड़ का नुकसान हो रहा। 4 साल में अब तक 300 करोड़ से अधिक का घाटा हुआ।
सप्लाई चेन बिगड़ी हुई है।
2017 में हाई कोर्ट के निर्देश पर बदली थी व्यवस्था
13 सितंबर 2017 को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने टेक होम राशन वितरण पर आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि आंगनबाड़ियों में राशन सप्लाई बड़े निजी ठेकेदारों या औद्योगिक घरानों से नहीं कराई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 का हवाला देते हुए व्यवस्था के विकेंद्रीकरण के निर्देश दिए गए।