दतिया कांड पर रघुनंदन शर्मा का महाविस्फोट: 'जेबी संगठन' बन गई है भाजपा, दिल्ली के प्रभारी सिर्फ दूध-मलाई खाने आते हैं!
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश भाजपा में 'दतिया कांड' को लेकर मचे घमासान के बीच पार्टी के पितृपुरुष और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ एक बड़ा और बेहद तीखा हमला बोला है। सबकी खबर को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में रघुनंदन शर्मा ने दतिया में हुई अनुशासनहीनता पर गहरी चिंता और नाराजगी जताते हुए इसे भाजपा के विनाश की शुरुआत बताया। उन्होंने बिना लाग-लपेट के कहा कि आज मध्य प्रदेश में भाजपा 'नेताओं की जेब का संगठन' बनकर रह गई है और दिल्ली से आने वाले प्रभारी केवल औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।
कुशाभाऊ ठाकरे का दौर याद दिलाया: 'तहसील का पदाधिकारी भी मंत्री नहीं बदल सकता था'
भाजपा के पुराने दिनों और कड़े अनुशासन को याद करते हुए रघुनंदन शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और संगठन शिल्पी कुशाभाऊ ठाकरे का एक ऐतिहासिक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया, "जब सुंदरलाल पटवा मुख्यमंत्री बने और उन्होंने अपने गृह जिले मंदसौर के अध्यक्ष को बदल दिया, तो ठाकरे जी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने शक्तिशाली मुख्यमंत्री पटवा को अपने कक्ष में बुलाकर साफ कहा था कि आपको सरकार चलाने के लिए बिठाया गया है, कलेक्टर बदलिए लेकिन संगठन में तहसील स्तर के एक पदाधिकारी को भी बदलने का अधिकार आपका नहीं है, यह संगठन तय करेगा।"
शर्मा ने दुख जताते हुए कहा कि आज वह दृढ़ता, सोच और क्षमता पूरी तरह गायब हो चुकी है। अब मंत्रियों और सांसदों के जेब के अध्यक्ष बने हुए हैं। किसी बड़े नेता को हाथ लगाओ, तो पूरा जेबी संगठन ढह जाता है, जैसा दतिया में देखने को मिला।
नरोत्तम के पटृटों ने उन्हें कमजोर किया, ये 'शहद चाटने वाले' लोग हैं
दतिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी और मुख्यमंत्री मोहन यादव को दी गई गाली पर रघुनंदन शर्मा ने सख्त कार्रवाई की वकालत की। उन्होंने कहा, "यदि आज संगठन में निर्णय लेने की क्षमता होती, तो दतिया से आए तमाम इस्तीफों को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया जाता और नारेबाजी करने वालों को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता। जब उनसे पूछा गया कि क्या नरोत्तम मिश्रा के साथ अन्याय हुआ है, तो उन्होंने कहा कि नरोत्तम अच्छे कार्यकर्ता हैं, लेकिन संगठन से बड़ा कोई नहीं होता। स्वयं को सर्वोपरि समझने की बीमारी सत्ता में बैठे लोगों को लग गई है। उन्होंने नरोत्तम के समर्थकों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके समर्थकों ने उनका भला नहीं किया, बल्कि एक ताकतवर नेता को निर्बल बना दिया। दर्द नरोत्तम मिश्रा के चुनाव हारने या जीतने का नहीं है, बल्कि दर्द उन 'शहद चाटने वाले' लोगों को है जिनकी थालियों में सत्ता का लाभ परोसा जा रहा था, जो अब बंद होने वाला है।
दिल्ली के प्रभारियों पर सीधा हमला: 'आते हैं, दूध-रबड़ी खाकर चले जाते हैं'
रघुनंदन शर्मा ने दतिया कांड के लिए स्थानीय नेताओं से ज्यादा दिल्ली के आलाकमान और केंद्रीय प्रभारियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, "दोष उनका है जो दिल्ली से आकर यहां के ठेकेदार बन गए हैं और संगठन को देखने का नाटक कर रहे हैं। वे यहां आते हैं, भाजपा कार्यालय में बैठते हैं और दूध-रबड़ी (मलाई) खाकर चले जाते हैं। उन्हें संगठन को बचाने की चिंता नहीं है। अगर संगठन ही नष्ट हो जाएगा, तो ऐसी सत्ताओं का क्या मतलब?"
सामंतशाही नहीं चलेगी, दतिया में युवा जीतेगा
चुनावी नतीजों और नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी के डर पर बात करते हुए शर्मा ने स्पष्ट किया कि जनता किसी की जेब में नहीं होती। आपातकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जनता लोकतंत्र को बेहतर समझती है। दतिया में अब सामंतशाही नहीं चलने वाली, वहां की जनता ने यदि ठान लिया है तो भाजपा का युवा उम्मीदवार आशुतोष (तिवारी) ही चुनाव जीतकर आएगा। उन्होंने अंत में संगठन को नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी वह गंगा है जिसका पानी कभी नहीं सूखता, अगर कड़े फैसले लेने से 50 कार्यकर्ता जाएंगे तो 100 नए कार्यकर्ता पार्टी में आ जाएंगे, इसलिए भाजपा को तत्काल कठोर कदम उठाने चाहिए।

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