सुनी सुनाई... पैर पर कुल्हाड़ी मारी या कुल्हाड़ी पर पैर दे मारा? नरोत्तम मिश्रा की कुंडली खंगालने में जुटीं एजेंसियां!
भोपाल, सबकी खबर।
भोपाल और ग्वालियर के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद हुए घटनाक्रम ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक दतिया में शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ हुई उग्र बगावत और नारेबाजी को दिल्ली दरबार ने बेहद गंभीरता से लिया है। खबर है कि पिछले 48 घंटों से केंद्रीय और राज्य की खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और पूर्व गृह मंत्री से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों, बेनामी संपत्तियों तथा व्यावसायिक निवेशों की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों का दावा है कि नरोत्तम मिश्रा के करीबियों, व्यापारिक साझेदारों और उनके पारिवारिक निवेशों का एक-एक ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसके तहत भोपाल के बैरागढ़ स्थित 'सिंधु टोंकी' मॉल में पूर्व मंत्री और उनके परिवार की हिस्सेदारी को लेकर दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं, साथ ही भोपाल के रतनपुर में दतिया के किसानों के नाम पर खरीदी गई करोड़ों रुपये की जमीनों के मालिकाना हक की भी जांच हो रही है। इसके अलावा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू द्वारा अतीत में दर्ज किए गए मामलों और लोकायुक्त में लंबित शिकायतों का पूरा ब्योरा तलब किया गया है। जांच के दायरे में नरोत्तम मिश्रा के गृह मंत्री रहते हुए जारी किए गए पिस्तौल लाइसेंसों की संख्या और ग्वालियर-दतिया में बने आलीशान रिसॉर्ट, होटल और नवग्रह मंदिर के वित्तीय स्रोत भी शामिल बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया में टिकट कटने के बाद समर्थकों द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन ने ही नरोत्तम मिश्रा की मुश्किलें बढ़ाई हैं। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ 'मुर्दाबाद' के नारे लगे थे, 11 घंटे तक हाईवे जाम रखा गया था, और मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ ऑन-कैमरा अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ था। जानकारों के मुताबिक यह जांच इसी अनुशासनहीनता का नतीजा है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह एक रूटीन प्रक्रिया है, जिसके तहत जब भी शीर्ष नेतृत्व या सरकार पर इस तरह के गंभीर हमले होते हैं, तो खुफिया तंत्र सक्रिय होकर संबंधित पृष्ठभूमि की रिपोर्ट तैयार करता है। इस पूरे विवाद के बाद नरोत्तम मिश्रा लगातार बैकफुट पर हैं और उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं का 'क्षणिक आवेश' बताते हुए मुख्यमंत्री हाउस से लेकर दिल्ली तक अपनी सफाई पेश की है। हालांकि आज मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद उन्हें अपने साथ हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर के जरिए नामांकन दाखिल कराने दतिया लेकर गए थे, लेकिन कैमरे की इस चमक के पीछे अंदरूनी कड़वाहट और प्रशासनिक जांच का शिकंजा साफ दिखाई दे रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले पर नरोत्तम मिश्रा या सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
यह एक 'सुनी सुनाई' हैं। जी हां, वही 'सुनी सुनाई' खबर—जिसका हमारे पास कोई लिखित प्रमाण या सरकारी ठप्पा नहीं होता। आपको भरोसा करना है तो करिए, नहीं करना है तो मत करिए। लेकिन राजनीति और प्रशासन के बंद कमरों में, सत्ता के गलियारों में जो कानाफूसी चलती है, जब वो हमारे कान तक आती है, तो 'सबकी खबर' पर वो 'सुनी सुनाई' की एक बड़ी इनसाइड स्टोरी बन जाती है।

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