दतिया/भोपाल, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश भाजपा के इतिहास में एक ऐसा कांड दर्ज हो गया है, जिसने दिल्ली से लेकर भोपाल तक हड़कंप मचा दिया है। इसे नाम दिया गया है—'दतिया कांड'। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का दतिया से टिकट क्या कटा, उनके समर्थकों ने बगावत की सारी हदें पार कर दीं। दतिया की सड़कों पर सरेआम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ 'मुर्दाबाद' के नारे लगे। हद तो तब हो गई जब सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव को ऑन-कैमरा मां की भद्दी गाली दी गई। अब इस सुलगती आग में सूबे के सबसे मँझे हुए सियासी खिलाड़ी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने घी डालने का काम कर दिया है।
दिग्विजय सिंह की 'तारीफ' या नरोत्तम को निपटाने का जाल?
वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक के एक वीडियो को शेयर करते हुए दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 
"यद्यपि मैं नरोत्तम मिश्रा का आलोचक हूं, किंतु उनके दुस्साहस की दाद देता हूं। आज के समय में भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं से नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद कहलवा लेना, उन्हें तानाशाह कहलवा देना, मोहन यादव को मां की गाली दिलवा देना... इसे और क्या कहेंगे? जय सियाराम।"
राजनीति के जानकार समझ रहे हैं कि दिग्विजय सिंह की यह 'तारीफ' दरअसल नरोत्तम मिश्रा को बधाई देने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बीजेपी के भीतर पूरी तरह 'निपटाने' की एक गहरी क्रोनोलॉजी है।
नरोत्तम की सफाई... लेकिन यह राजनीति है बाबू!
बढ़ते बवाल को देख नरोत्तम मिश्रा बैकफुट पर आए। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं का 'क्षणिक आवेश' बताया, उन्हें समझाया और सीएम हाउस से लेकर दिल्ली तक अपनी सफाई दे आए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह डैमेज कंट्रोल काफी है?
दतिया कांड ने बीजेपी के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
व्यक्ति बनाम संगठन: क्या दतिया में भाजपा का कोई वजूद ही नहीं था? क्या वहां सिर्फ नरोत्तम मिश्रा की समानांतर पार्टी चल रही थी कि एक नेता का टिकट कटते ही पूरे जिला संगठन ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया?
11 घंटे का चक्काजाम: अपनी ही सरकार में, अपने ही शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ 11 घंटे तक सड़क जाम करना क्या अनुशासन की धज्जियां उड़ाना नहीं है?
'दूल्हा' बनाकर ले गए, लेकिन खाई बहुत गहरी है
फिलहाल तो चुनावी मजबूरी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद नरोत्तम मिश्रा को अपने बगल में हवाई जहाज में बैठाकर ग्वालियर ले गए, वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए दतिया ले जाकर नामांकन भरवाया। नरोत्तम को आज 'दूल्हा' बनाकर ले जाया गया है, लेकिन कैमरे की इस चमक के पीछे की हकीकत बेहद कड़वी है।
मुख्यमंत्री और नरोत्तम मिश्रा के बीच जो दूरी आ चुकी है, वो आने वाले समय में साफ दिखेगी। राजनीति में सब कुछ बर्दाश्त किया जा सकता है, लेकिन ऑन-कैमरा मां की गाली कोई नहीं भूलता। यह बात मोहन यादव के दिल में भी दर्ज हो चुकी है और बीजेपी के इतिहास में भी।

'नेताओं को मिटाना भी जानती है बीजेपी'
अगर आप सोच रहे हैं कि नरोत्तम मिश्रा को माफी मिल गई है, तो किसी गलतफहमी में मत रहिए। यह वो नई 'भारतीय जनता पार्टी' है जो नेता बनाना भी जानती है और पलक झपकते ही नेताओं को मिटाना भी जानती है।

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