BJP का कैडर या नरोत्तम की 'सेना'? दतिया बवाल से हिली सरकार; 131 सरपंचों के इस्तीफे, पुलिस पर पथराव और दिल्ली को खुली चुनौती
भोपाल/दतिया, सबकी खबर।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना मध्य प्रदेश भाजपा के इतिहास का सबसे बड़ा भूचाल बन चुका है। जो नरोत्तम मिश्रा कल तक दूसरों की सरकारें गिराने के 'मास्टरमाइंड' और बीजेपी के 'संकटमोचक' कहलाते थे, आज दतिया की सड़कों पर भड़की बगावत की आग में वे खुद अपने राजनीतिक वजूद के सबसे बड़े संकट से जूझ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकारों की नजरों से दतिया के जमीनी हालातों को देखें, तो यह गुस्सा सिर्फ एक टिकट कटने का नहीं है, बल्कि यह दिल्ली बनाम भोपाल की उस लड़ाई का विस्फोट है जिसने मध्य प्रदेश भाजपा को हिलाकर रख दिया है।
दतिया बवाल की 5 सबसे बड़ी और तीखी बातें
1. चार दशक का सबसे बड़ा विद्रोह; ऑन-कैमरा गालियां और नारे
बीजेपी जिसे कैडर बेस और अनुशासित पार्टी कहती है, उसी के कार्यकर्ता दतिया में ऑन-कैमरा सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भद्दी गालियां दे रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के मुर्दाबाद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ 'हाय-हाय' के नारे लग रहे हैं। मध्य प्रदेश भाजपा में पिछले 40 साल में ऐसा अनुशासनहीन और आक्रामक रूप कभी नहीं देखा गया।
2. 11 घंटे तक बंधक रहा नेशनल हाईवे-3, पुलिस पर पथराव
आगरा से मुंबई को जोड़ने वाले NH-3 (ग्वालियर-झांसी सेक्टर) को करीब 11 घंटे तक नरोत्तम समर्थकों ने बंधक बनाए रखा। रात भर छोटे बच्चे, महिलाएं और एंबुलेंस जाम में तड़पते रहे। सुबह 4 बजे जब प्रशासन ने आंसू गैस के गोले छोड़े, तो भीड़ ने पुलिस को घेरकर पत्थरों और ईंटों से हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में एसपी, एएसपी और एसडीओपी समेत 8 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए और आरआई (RI) की गाड़ी पलट दी गई।
3. 131 सरपंचों और पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा, संगठन ठप
दतिया में बगावत इस कदर हावी है कि बूथ स्तर से लेकर जिला कार्यकारिणी तक ने सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए हैं। सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र यादव (लला) के नेतृत्व में 131 पंचायतों के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा देकर खुली चुनौती दे दी है। कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि "दतिया को विकास पुरुष (नरोत्तम मिश्रा) मिला था, लेकिन संगठन ने ऐसे व्यक्ति (आशुतोष तिवारी) को टिकट दे दिया जिसे कोई जानता तक नहीं।"
4. 'अमित शाह के खास', फिर भी मुंह तक आते-आते छिना कोर!
राजनीतिक गलियारों में यह जगजाहिर है कि अमित शाह मध्य प्रदेश में दो नेताओं को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं—कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा। लेकिन आज दोनों की हालत प्रदेश की सियासत में किसी से छिपी नहीं है। विश्लेषकों के मुताबिक, बीजेपी में अमित शाह की पसंद भले कुछ भी हो, लेकिन फैसला 'नंबर वन' (पीएम मोदी) का ही सर्वोपरि होता है। कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश की 'बैट कांड' वाली गलती को प्रधानमंत्री ने आज तक माफ नहीं किया, और नरोत्तम के मामले में भी दिल्ली के सर्वे को आगे रखकर उनका टिकट काट दिया गया, जबकि भोपाल (मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन) ने नरोत्तम का नाम ही रिकमेंड किया था।
5. जब दतिया जल रहा था, तब नरोत्तम का मोबाइल क्यों बंद था?
इस पूरे बवाल में नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठ रहे हैं। जब दतिया में बवाल काटा जा रहा था, गाड़ियां पलटी जा रही थीं, तब 'दादा' अपना मोबाइल स्विच ऑफ करके बैठ गए थे। हालांकि, बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर आकर कार्यकर्ताओं से पेट्रोल/केरोसिन डालकर आत्मदाह न करने और पार्टी फोरम पर बात करने की आधी-अधूरी अपील की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पर्दे के पीछे की कड़क हकीकत: अब आगे क्या?
बीजेपी की राजनीति को करीब से जानने वालों का कहना है कि पार्टी बड़े-बड़े सूरमाओं को मिट्टी में मिलाना और घर बैठाना जानती है। पिछले 5-7 सालों में एमपी के करीब 40 दिग्गज नेताओं की सूची है जिन्हें पार्टी ने चुपचाप घर बैठा दिया। क्या नरोत्तम मिश्रा भी उसी सूची का हिस्सा बनने जा रहे हैं? सोशल मीडिया पर अब यह नैरेटिव भी चल पड़ा है कि अगर यह बगावत तुरंत शांत नहीं हुई, तो विद्रोह करने वाले नेताओं के घर ईडी (ED) की एंट्री तय है। फिलहाल, डैमेज कंट्रोल के लिए उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा विशेष विमान से दतिया पहुंच चुके हैं, लेकिन दतिया के मौजूदा हालातों को देखकर साफ है कि अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए ढोल-नगाड़ों के साथ नामांकन भरना तो दूर, शांति से पर्चा दाखिल करना भी लोहे के चने चबाने जैसा होने वाला है।

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