भोपाल। 
क्या कोई एक डॉक्टर एक ही समय में तीन जिलों में नौकरी कर सकता है? मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के एक संविदा पर काम करने वाले डॉक्टर ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है. शहडोल का एक डॉक्टर, जो लोकायुक्त ट्रैप में पकड़ा गया था खरगोन और श्योपुर के सरकारी अस्पतालों में भी नौकरी कर रहा था. इस मामले का पता चलने पर खरगोन के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डी.एस. चौहान ने इसे गंभीर अनियमितता माना और एक जांच समिति बनाकर मामले की जांच के आदेश दिए.
एक ही डॉक्टर तीन जिलों में कर रहा था सरकारी नौकरी
दरअसल, डॉ. महेशचंद्र शर्मा नाम के एक संविदा डॉक्टर पिछले ढाई साल से राज्य के तीन अलग-अलग जिलों शहडोल, खरगोन और श्योपुर में सरकारी डॉक्टर के तौर पर काम कर रहे थे और तीनों जगहों से सैलरी भी ले रहे थे. फरवरी 2023 से उनकी पोस्टिंग खरगोन जिले के सेगांव ब्लॉक में केली प्राइमरी हेल्थ सेंटर में  संविदा मेडिकल ऑफिसर (चिकित्सा अधिकारी) के तौर पर थी.  यह बड़ा फ्रॉड तब सामने आया जब उनके काम करने के तरीकों पर लगातार सवाल उठने लगे.
CMHO ने दिए जांच के आदेश
इस मामले का संज्ञान लेते हुए खरगोन के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. डी.एस. चौहान ने इसे पूरी तरह से गैर-कानूनी और धोखाधड़ी करार दिया है. उन्होंने तत्काल प्रभाव से एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं.
अटेंडेंस सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) ने बताया कि डॉ. शर्मा हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही अस्पताल आते थे और बाकी दो दिन अनुपस्थित रहते थे. शिकायत मिलने के बाद पूर्व में भोपाल मुख्यालय तक उनके ठीक से काम न करने को लेकर पत्राचार भी किया गया था. फिलहाल आरोपी डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद  है. अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि सरकार के 'सार्थक अटेंडेंस ऐप' पर तीन अलग-अलग जिलों में डॉक्टर की हाजिरी एक साथ कैसे दर्ज हो रही थी और इस मिलीभगत में कौन-कौन शामिल है.