भोपाल।
एमपी में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है। इसमें दो हिंदू सदस्यों को जगह मिली है। इसे लेकर कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों ने विरोध किया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा है कि यह कदम जल्दबाजी में उठाया गया है क्योंकि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
दो-गैर मुस्लिम सदस्यों की एंट्री
दरअसल, राज्य सरकार ने हाल ही में नए वक्फ कानून के प्रावधानों के तहत मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। ऐसा करने वाला एमपी पहला राज्य बन गया है। नए गठित 10-सदस्यीय बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम विशेषज्ञ और चार महिला सदस्य शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है मामला
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने दावा किया है कि मुस्लिम समुदाय के बाहर के सदस्यों को शामिल करने का मुद्दा उन मुख्य बिंदुओं में से एक है, जिनकी सुप्रीम कोर्ट परीक्षण कर रहा है।अनुचित है यह कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वक्फ बोर्ड में दूसरे समुदाय के सदस्यों को शामिल करना अनुचित है क्योंकि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।सुप्रीम कोर्ट ने खुद दो मुद्दों पर संज्ञान लिया था, जिनमें से एक यह था कि दूसरे समुदाय के किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी हमारे पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत तर्कों के आधार पर की थी।
एमपी सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों
मसूद ने पूछा है कि जब पूरी प्रक्रिया अभी चल रही है तो मध्य प्रदेश सरकार ने इतनी जल्दबाजी क्यों की। देश भर की अन्य राज्य सरकारें ऐसे फैसले नहीं ले रही हैं। फिर भी मोहन यादव सरकार ऐसा कर रही है। इसके अलावा एक और उल्लंघन यह है कि प्रवाधान दूसरे समुदाय के दो सदस्यों के लिए था लेकिन आपने तीन नियुक्त किए। मैं इस फैसले का विरोध करता हूं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा।