जी हां सूबे का स्वास्थ्य महकमा इन दिनों खुद आईसीयू मेें हैं। आज सबकी खबर में फिर एक सुनी सुनाई की चर्चा हैं। सुनी सुनाई ये है कि मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की सेहत सुधारने के लिए खुद मुख्यमंत्री जी एक बहुत बड़ी 'सर्जरी' करने के मूड में आ गए हैं। और इस सर्जरी में विभाग के दो सबसे बड़े 'विशेषज्ञ' यानी एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अशोक वर्णवाल साहब और आयुक्त धनराजू जी की कुर्सी की विदाई लगभग तय मानी जा रही है! अब आप सोचेंगे कि भला स्वास्थ्य विभाग में ऐसा क्या हो गया? अरे हुजूर, पिछले 15 दिनों के अखबार उठाकर देखिए, स्वास्थ्य विभाग ने तो 'जादूगरी' के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं! इंदौर में एक ऐसा अस्पताल मिला है जो सिर्फ 'मिस्टर इंडिया' की घड़ी पहनकर काम कर रहा है। मतलब, कागजों पर चमचमाता अस्पताल है, 87 डॉक्टर तैनात हैं, बकायदा सरकार की तिजोरी से डॉक्टरों की तनख्वाह भी निकल रही है... लेकिन जब जमीन पर जाकर ढूंढो, तो अस्पताल ही गायब है! इसे कहते हैं डिजिटल इंडिया का असली चमत्कार—अस्पताल ही गायब कर दिया! और तो और, विभाग में एक 'पाराशर' नाम के दिव्य डॉक्टर साहब भी अवतरित हुए हैं। वो तनख्वाह तो पूरी ईमानदारी से स्वास्थ्य विभाग से उठाते हैं, लेकिन ड्यूटी अपनी खुद की प्राइवेट कंपनी में देते हैं। धन्य है ऐसा टैलेंट! अखबार वाले रोज सबूतों की गड्डियां छाप रहे हैं, लेकिन हमारे एडिशनल चीफ सेक्रेटरी साहब इतने 'व्यस्त' हैं कि उन्हें इस जादुई खेल को देखने की फुर्सत ही नहीं है। आज के दैनिक भास्कर का पहला पन्ना तो आपने देखा ही होगा? डॉक्टरों की पोस्टिंग का ऐसा 'अद्भुत' खेल रचा गया कि लॉटरी सिस्टम भी शरमा जाए। डॉक्टरों से बड़े प्यार से पूछा गया—"बताओ भाई, तुम्हारी चॉइस क्या है?" डॉक्टरों ने चॉइस दी। लेकिन जब लिस्ट बाहर आई, तो मालूम पड़ा कि चॉइस गई तेल लेने! मनमाने तरीके से ऐसी पोस्टिंग बांटी गई कि डॉक्टर खुद ढूंढ रहे हैं कि वो मध्य प्रदेश के किस कोने में फेंक दिए गए हैं। अब इस खेल के पीछे कौन सा 'चमत्कारी लिफाफा' काम कर रहा था, ये तो सिर्फ ऊपर वाला जाने या विभाग के साहब लोग! ऊपर से टेंडरों का 'मैनिपुलेशन' यानी ठेकों की ऐसी 'कस्टमाइजेशन' चल रही है कि जो ठेका जिसके लिए फिट बैठना हो, टेंडर की शर्तें रातों-रात वैसी ही बदल जाती हैं। NHM यानी नेशनल हेल्थ मिशन और हेल्थ कॉर्पोरेशन में भ्रष्टाचार के इतने 'विटामिन' बंट रहे हैं कि पूरा विभाग ओवरडोज का शिकार हो गया है। 'बिना रिमोट' के स्वास्थ्य मंत्री और अफसरों का 'राज' इस पूरे ड्रामे में सबसे ज्यादा सहानुभूति तो हमारे उप-मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला जी के साथ होती है। बेचारे मंत्री तो बना दिए गए, लेकिन विभाग में उनकी कितनी चलती है? शायद उतनी ही, जितनी घर में रिमोट खो जाने के बाद टीवी पर चलती है! अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग में ऐसा 'कॉकस' यानी अपना एक अलग 'साम्राज्य' बना लिया है कि सरकार की छवि रोज वेंटिलेटर पर जा रही है। जब शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री जी के पास पहुंचीं, तो अब खबर आई है कि सीएम साहब खुद मंत्रालय की टेबल पर ऑपरेशन का एप्रन पहनकर बैठने वाले हैं। डॉक्टरों का इलाज करने वाले इन दोनों बड़े IAS साहबों का 'इलाज' बहुत जल्द होने वाला है। अशोक वर्णवाल जी और धनराजू जी की स्वास्थ्य विभाग से विदाई की फाइल पर स्याही सूखने का इंतजार है।