भोपाल। 
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की एकमात्र कांग्रेस सीट के लिए पार्टी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा कर दी है। लंबे मंथन और कई दावेदारों के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन में लंबे समय से सक्रिय और राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा जताया है। उनके नाम की घोषणा के साथ ही राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू कर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाई। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा से आने वाली मीनाक्षी ने कम उम्र में ही कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से जुड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा था।
छात्र राजनीति से बनाई पहचान
मीनाक्षी नटराजन ने राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) में काम करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। संगठन में सक्रियता और नेतृत्व क्षमता के चलते उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिलीं। बाद में उन्होंने युवा कांग्रेस में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं और संगठन विस्तार में अहम योगदान दिया।
मंदसौर से पहुंचीं लोकसभा
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें मंदसौर संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता लक्ष्मीनारायण पांडे को हराकर जीत दर्ज की और पहली बार संसद पहुंचीं। सांसद रहते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा
कांग्रेस संगठन में मीनाक्षी नटराजन को राहुल गांधी की भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। पार्टी के वैचारिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। पिछले कुछ वर्षों में उन्हें विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं। वे कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में रणनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर सक्रिय रही हैं।
महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा भेजकर महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने और संगठन में लंबे समय से काम कर रहे नेताओं को सम्मान देने का संदेश दिया है। साथ ही यह फैसला मध्य प्रदेश में आगामी राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।
दिग्विजय सिंह की जगह लेंगी मीनाक्षी
कांग्रेस की इस सीट पर वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राज्यसभा सदस्य थे। उनके चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के बाद नए चेहरे की तलाश शुरू हुई थी। कई नामों पर चर्चा के बाद पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाकर संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है।