MP का 'कलेक्ट्री मॉडल' अब तमिलनाडु में हिट! सीएम विजय ने डॉ. मोहन यादव की तर्ज पर 13 जिलों में तैनात कीं महिला कलेक्टर
भोपाल।
मध्य प्रदेश का प्रशासनिक और महिला सशक्तिकरण का मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ी नजीर बनने लगा है। 'नारी शक्ति' को जिलों की कमान सौंपने के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के फॉर्मूले का जादू अब दक्षिण भारत में भी सिर चढ़कर बोल रहा है। तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और फिल्म स्टार से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय मध्य प्रदेश के इस 'कलेक्ट्री मॉडल' के मुरीद हो गए हैं। उन्होंने पद संभालने के महीने भर के भीतर ही अपने राज्य में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 13 जिलों की कमान महिला आईएएस (IAS) अफसरों के हाथ में सौंप दी है।तमिलनाडु के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास में यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में महिला कलेक्टरों की पदस्थापना एक साथ की गई है। यहाँ तक कि कुछ जिलों को तो अपने इतिहास में पहली बार कोई महिला कलेक्टर मिली है। सीएम विजय के इस कदम को प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के एक क्रांतिकारी नवाचार के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी प्रेरणा सीधे तौर पर मध्य प्रदेश से जुड़ी है।डॉ. मोहन यादव ने ऐसे रखी थी इस मॉडल की नींवमध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को सत्ता संभालने के बाद से ही प्रशासनिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया था। इसकी शुरुआत तब हुई जब उन्होंने प्रदेश की पहली प्रशासनिक मुखिया (मुख्य सचिव) के रूप में श्रीमती वीरा राणा को जिम्मेदारी सौंपी और बाद में उन्हें 3 महीने का एक्सटेंशन भी दिलाया।वर्तमान में मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से 17 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथों में है। हाल ही में प्रदेश में 24 जिलों के कलेक्टर बदले गए थे, लेकिन सरकार ने महिला सशक्तिकरण के अपने इस रुख को कायम रखा और महिला कलेक्टरों की संख्या में कोई कमी नहीं होने दी। अब इसी तर्ज पर तमिलनाडु सरकार भी आगे बढ़ती दिख रही है।मध्य प्रदेश और तमिलनाडु का 'कलेक्ट्री' गणित: एक नजर मेंनीचे दी गई तालिकाओं से स्पष्ट है कि दोनों राज्यों में प्रशासनिक नेतृत्व किस तरह महिला अधिकारियों के हाथों में सुरक्षित है।

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