दबंग आईपीएस मनीष भारद्वाज के ट्रांसफर से एमपी पुलिस में उबाल: 'रसूखदारों' पर एक्शन की मिली ऐसी सजा, जूनियर अफसरों में हताशा!
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। साल 2023 बैच के तेजतर्रार और दबंग आईपीएस अधिकारी मनीष भारद्वाज को भोपाल के रसूखदार इलाके एमपी नगर (सहायक पुलिस आयुक्त) से हटाकर रातों-रात पुलिस मुख्यालय (PHQ) में अटैच कर दिया गया है। शनिवार के दिन मंत्रालय खोलकर गृह विभाग की सचिव द्वारा जारी किए गए इस अचानक ट्रांसफर ऑर्डर ने मध्य प्रदेश के तमाम युवा और नए आईपीएस अफसरों के बीच हताशा और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। यह ट्रांसफर सिर्फ एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि ईमानदारी और दबंगई से काम करने वाले नए अधिकारियों के मनोबल पर बहुत बड़ा कुठाराघात है।
क्या है पूरा मामला? जानिए क्यों बलि का बकरा बने आईपीएस मनीष
दरअसल, यह पूरा विवाद भोपाल में 6 मई को एक मासूम बच्ची के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना से जुड़ा है। इस संवेदनशील मामले को दैनिक भास्कर समाचार पत्र ने बेहद लापरवाही से प्रकाशित किया, जिससे जाने-अनजाने में पीड़ित बच्ची और उसके परिवार की पहचान उजागर हो गई। मध्य प्रदेश प्रशासन या स्थानीय पुलिस की नजर इस पर नहीं गई, लेकिन जयपुर की दबंग सामाजिक कार्यकर्ता और वकील रतिका पारिक ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया। रतिका पारिक के दबाव के बाद जयपुर के बजाज नगर थाने में 'जीरो पर एफआईआर' दर्ज की गई और मामला भोपाल के एमपी नगर थाने ट्रांसफर कर दिया गया। एमपी नगर के टीआई इस मामले की गंभीरता और 'रसूखदारों' के इंवॉल्वमेंट को भांपकर तुरंत छुट्टी पर चले गए।
फाइल पर नहीं देखा चेहरा, सीधे दर्ज की FIR
जब यह फाइल सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनीष भारद्वाज के पास पहुंची, तो उन्होंने अपनी ट्रेनिंग और ईमानदारी का परिचय देते हुए बिना किसी रसूख या चेहरे को देखे, जयपुर से आई जीरो एफआईआर के आधार पर आगामी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे दिए। इस निर्देश के बाद दैनिक भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल और संबंधित रिपोर्टर के खिलाफ बेहद गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हो गया, जिसमें: BNS की धारा 72 (1), पोक्सो एक्ट (POCSO) की धारा 23 (2), जेजे एक्ट (JJ Act) की धारा 74 शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, आईपीएस मनीष भारद्वाज ने इस हाईप्रोफाइल एफआईआर की जानकारी पहले सीनियर अधिकारियों (डीजीपी या पुलिस कमिश्नर) को नहीं दी थी। हालांकि, उनके पास कानूनी रूप से इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था क्योंकि एफआईआर जयपुर से ही तय होकर आई थी।
वरिष्ठ अधिकारियों की 'चुप्पी' पर उठे गंभीर सवाल
30 तारीख को एफआईआर दर्ज हुई और उसी रात मनीष भारद्वाज को फील्ड से हटाकर पीएचक्यू में एआईजी बना दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में मध्य प्रदेश पुलिस के तीन सबसे ईमानदार और जूनियर अफसरों के लिए लड़ने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
डीजीपी मकवाना
एडीजी इंटेलिजेंस ए साई मनोहर
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय सिंह
चर्चा है कि ये तीनों वरिष्ठ अधिकारी चाहते तो सरकार को कंवेंस कर सकते थे और अपने एक होनहार जूनियर अधिकारी के साथ खड़े हो सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जो बेहद चौंकाने वाला है।
युवा आईपीएस अफसरों में हताशा: 'क्या अब चेहरा देखकर होगी कार्रवाई?'
मनीष भारद्वाज के इस अचानक ट्रांसफर से मध्य प्रदेश के नए और ट्रेनी आईपीएस अफसरों में गहरा असंतोष है। अंदरूनी गलियारों में युवा अफसर अब चुटकी ले रहे हैं और वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल पूछ रहे हैं। "क्या अब हमारी ट्रेनिंग के सिलेबस में यह भी शामिल किया जाएगा कि एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपी का वजन, रसूख और उसका रैकॉर्ड चेक किया जाए? क्या अब हम फाइल देखकर नहीं, बल्कि चेहरा और रसूख देखकर काम करें?"
कैसे सुधरेगा माहौल? मुख्यमंत्री से उम्मीदें
पत्रकारिता जगत और कानून के जानकारों का मानना है कि यदि रसूखदारों पर हाथ डालने की सजा इस तरह ट्रांसफर के रूप में मिलेगी, तो भविष्य में कोई भी नया अधिकारी अवैध खनन, भू-माफिया, ड्रग्स या रसूखदार अपराधियों के खिलाफ रिस्क लेने से कतराएगा। फिलहाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी को पुलिस महकमे के इस गिरते मनोबल को संभालना होगा। मांग उठ रही है कि मनीष भारद्वाज जैसे दबंग अफसर की पीठ थपथपाई जाए और उन्हें जल्द से जल्द किसी अच्छे जिले में तैनात कर काम करने का पूरा मौका दिया जाए।

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