भोपाल।
शहर को आवारा कुत्तों के आतंक से मुक्ति दिलाने और सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने के लिए भोपाल नगर निगम ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 के निर्देश का पालन करते हुए बीएमसी कोलाज के कलियासोत इलाके में शहर का पहला सरकारी डॉग शेल्टर बनाने जा रही है। एक एकड़ में फैलने वाले इस आधुनिक केंद्र में करीब 1,500 से 2,000 आवारा कुत्तों को एक साथ रखने की क्षमता होगी। इस प्रोजेक्ट के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
इन 9 'नो-डॉग जोन्स' पर रहेगा पहला फोकस
बीएमसी के वेटरनरी विंग के अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती चरण में शहर के नौ चिन्हित 'नो-डॉग जोन्स' से ही कुत्तों को पकड़कर इस नए शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाएगा। इन जोन्स में स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शामिल हैं, जहां आवारा कुत्तों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा और स्वच्छता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पिछले साल शहर में ऐसी करीब 900 लोकेशन की पहचान की गई थी, जहां से अब चरणबद्ध तरीके से आवारा कुत्तों को हटाया जाएगा।
केवल नसबंदी काफी नहीं
फिलहाल बीएमसी अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर चलाती है, जहां सालाना करीब 20,000 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है। हालांकि, इन सेंटर्स में कुत्तों को नसबंदी के बाद सिर्फ पांच दिन ही रखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि सिर्फ नसबंदी से इस समस्या का हल नहीं निकलेगा, इसलिए हर जिले में स्थायी शेल्टर होम बनाए जाएं। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन की व्यवस्था और निर्माण का काम इंजीनियरिंग विभाग को सौंपा गया है।