भोपाल। 
मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों को लेकर अंदरूनी स्तर पर मंथन शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो इस बार पार्टी केवल परंपरागत चेहरों पर नहीं, बल्कि नए समीकरण और नए नामों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। अंतिम सहमति बनने के बाद संभावित नाम बंद लिफाफे में केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाने की तैयारी है। प्रदेश से भाजपा के दो राज्यसभा सांसदों — केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी — का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। वहीं कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। ऐसे में चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का भी माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा इस चुनाव को संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और भविष्य की राजनीति से जोड़कर देख रही है। पार्टी के भीतर नए चेहरों को अवसर देने पर चर्चा तेज है, हालांकि अनुभवी नेताओं की उपयोगिता को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन को लेकर भी अलग-अलग समीकरण सामने आ रहे हैं। केंद्र सरकार में उनकी भूमिका और संगठनात्मक सक्रियता को देखते हुए उन्हें दोबारा मौका दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं यदि पार्टी राज्य से स्थानीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देती है तो तस्वीर बदल सकती है। दूसरी ओर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी के नाम को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है। आदिवासी चेहरे और संघ से मजबूत जुड़ाव उनकी ताकत माने जाते हैं, लेकिन पार्टी के भीतर युवा नेतृत्व को आगे लाने की सोच भी चर्चा में है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के जरिए कांग्रेस की रणनीति को परखने का प्रयास कर सकती है। हालांकि इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है।अब निगाहें पार्टी की आगामी बैठकों और दिल्ली से मिलने वाले संकेतों पर टिकी हैं। राज्यसभा की यह लड़ाई केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संदेशों की दिशा भी तय कर सकती है।