भोपाल । 
मध्य प्रदेश में इन दिनों मंत्रियों की परीक्षाएं चल रही है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन के वरिष्ठ नेतागण राज्य सरकार के सभी मंत्रियों की बैठकें ले रहे हैं। पहले दिन 20 मंत्रियों और दूसरे दिन शेष 11 मंत्रियों से चर्चा हुई। इन बैठकों में मंत्रियों के विभागीय कामकाज, संगठन से समन्वय और प्रभार वाले जिलों में उनके कामों के आधार पर 11 बिंदुओं वाले प्रोफार्मे भरवाए गए हैं। खास बात यह कि खराब परफॉरमेंस वाले मंत्रियों की सूची तैयार की जा रही है। इतना ही नहीं इन मंत्रियों पर दिल्ली हाईकमान की भी पैनी नजर है।
मोहन सरकार और भाजपा संगठन द्वारा दो दिन चली बैठकों में सामने आई परफॉर्मेंस के आधार पर रिपोर्ट कार्ड तैयार है। मुख्यमंत्री निवास में दो दिन तक चली मंत्रियों की वन-टू-वन समीक्षा बैठक के बाद अब उनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट दिल्ली तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश द्वारा मंत्रियों से भरवाए गए 11 बिंदुओं वाले प्रोफार्मे को लेकर दिल्ली गए हैं। इन रिपोर्ट कार्डों के आधार पर अगला एक्शन लिया जाएगा। इससे प्रदेश के कई मंत्रियों की बेचैनी बढ़ गई है।
क्या था प्रोफार्मा में..
बैठक के दौरान मंत्रियों को एक प्रोफार्मा भरने को दिया गया। इसमें उनसे पूछ गया कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने अपने विभाग में कौन-कौन से नवाचार किए, केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति क्या रही और अगले छह महीने की उनकी कार्ययोजना क्या है। इसके अलावा उनके प्रभार वाले जिलों में उनके दौरे, पार्टी कार्यालयों में उपस्थिति, रात्रि विश्राम, कार्यकर्ताओं से संवाद और जिला कोर कमेटी की बैठकों में कितनी भागीदारी की जैसी जानकारियां भी मांगी गई।
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो बेहतर प्रदर्शन करने वाले विभागों के नवाचारों को अन्य विभागों में लागू करने पर भी विचार होगा। वहीं खराब परफॉर्मेंस करने वाले नेताओं के खिलाफ एक्शन भी लिया जा सकता है। मंत्रियों के साथ वन टू वन चर्चा और कामों की समीक्षा को राज्य सरकार इसे आगामी वर्षों की प्रशासनिक रणनीति तय करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। सरकार का फोकस अब लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने, योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर रहेगा।
सूत्रों के मुताबिक, कई मंत्रियों के खराब प्रदर्शन, घटिया बयानबाजी और हल्की कार्यशैली से संगठन और सीएम मोहन दोनों ही संतुष्ट नहीं है। ऐसे मंत्रियों को भाजपा नेतृत्व ने वन-टू-वन चर्चा के दौरान स्पष्ट चेतावनी दी गई। मंत्रियों से कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव को देखते हुए वे अभी से अपने जिलों में सक्रियता बढ़ाएं और संगठन के साथ समन्वय बनाकर रणनीति तैयार करें। अन्यथा बड़ा एक्शन लिया जा सकता है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि मंत्रियों की यह समीक्षा केवल औपचारिक कवायद नहीं है, बल्कि रिपोर्ट कार्ड के आधार पर प्रदेश में होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की भूमिका तैयार कर रही है। वहीं दूसरी ओर हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मीडिया के सामने मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना इंकार किया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो आगामी महीनों में मंत्रिमंडल में बड़े स्तर पर फेरबदल हो सकता है। इसमें खराब रिपोर्ट वाले मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, वहीं कुछ अन्य विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।