भोपाल। 
राज्य में खनन समेत विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी देने वाली संस्था सिया (राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण) में अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। सिया के चेयरमैन और सदस्य पिछले दो दिन से पूरे कार्यालयीन समय अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठे रहे, लेकिन कोई काम नहीं हो सका। अब सिया ने राज्य शासन को पत्र लिखकर बताया है कि वे 12 और 13 मई को निर्धारित 949वीं और 950वीं बैठकों के लिए पूरे वक्त बैठे रहे, लेकिन केवल इसलिए बैठक नहीं हो सकी, क्योंकि सदस्य सचिव उपलब्ध नहीं थे। इन बैठकों का एजेंडा केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर दर्ज हो चुका है, इसलिए प्रोजेक्ट से जुड़े लोग भी सिया कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
न बैठकें हो पा रही हैं और न ही कोई निर्णय
सिया अध्यक्ष शिव नारायण सिंह चौहान और सदस्य डॉ. सुनंदा सिंह रघुवंशी ने पर्यावरण विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल को पत्र लिखकर पूछा है कि सिया के सदस्य सचिव के न होने से उनकी बैठकें नहीं हो पा रही हैं, न ही कोई निर्णय हो पा रहे हैं, उन्हें अपने स्तर पर पता करने पर जानकारी मिली है कि सदस्य सचिव सुधीर कोचर ट्रेनिंग पर बाहर गए हुए हैं, उनके ना रहने तक यदि किसी अधिकारी को प्रभार दिया गया है तो उन्हें इसकी जानकारी देकर निर्देशित करें, कि वे बैठकों में उपस्थित रहें। वहीं एसीएस बर्णवाल का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं हैं।
किसको दिया प्रभार, इसे लेकर स्थिति ही स्पष्ट नहीं
गौरतलब है कि सिया के सदस्य सचिव सुधीर कोचर 10 मई से एक माह के लिए मिड-करियर ट्रेनिंग लेने मंसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी गए हुए हैं। लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी में सिया के सदस्य-सचिव का प्रभार किसी दूसरे अधिकारी को दिया गया है या नहीं इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हैं। बिना सदस्य सचिव के सिया में पर्यावरणीय मंजूरी के आवेदनों पर सुनवाई की बैठकें पूरी तरह ठप हो गई हैं। वहीं पर्यावरण विभाग और सिया के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान भी ठप हो गया है।
सिया अध्यक्ष और सदस्य ने लिखा है नाराजगी भरा पत्र
सिया के अध्यक्ष व सदस्य की ओर से एसीएस पर्यावरण विभाग को लिखे पत्र में साफ कहा है कि सदस्य सचिव सुधीर कुमार कोचर के प्रशिक्षण पर जाने की संभावना पहले से थी तो, उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था की कोई सूचना प्राधिकरण को क्यों नहीं दी गई।
नियत समय पर बैठकें न होने से प्रदेश का विकास बाधित हो रहा है और परियोजना प्रस्तावक परेशान हो रहे हैं। इस अव्यवस्था से मप्र सरकार और सिया की छवि धूमिल हो रही है । सिया की ओर से यह पत्र केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी भेजा है। सिया ने मांग की है कि यदि सदस्य सचिव अवकाश या प्रशिक्षण पर हैं, तो उनके स्थान पर अधिकृत अधिकारी की जानकारी तत्काल साझा की जाए ताकि लंबित परियोजनाओं पर निर्णय लिया जा सके।