MP में आदिवासी सबसे असुरक्षित: अपराध के मामलों में प्रदेश फिर नंबर-1; देश की हर तीसरी घटना अकेले मध्य प्रदेश में
भोपाल।
मध्य प्रदेश एक बार फिर आदिवासियों के लिए देश का सबसे असुरक्षित राज्य बनकर उभरा है। NCRB 2024 के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में आदिवासियों के खिलाफ दर्ज कुल मामलों में से अकेले 31.75% मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। यह लगातार दूसरा साल है जब राज्य इस शर्मनाक सूची में पहले स्थान पर है।
मणिपुर जैसे हालात, आंकड़ों में खौफ
हैरानी की बात यह है कि जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में जहां 2023 में 3,399 मामले दर्ज हुए थे, वहीं मध्य प्रदेश में बिना किसी बड़े दंगे के 2024 में 3,165 मामलों के साथ लगभग उसी स्तर पर पहुंच गया है। हत्या के मामलों में भी राज्य ने राष्ट्रीय औसत (13%) को पीछे छोड़ते हुए 24% की वृद्धि दर्ज की है।
बेटियां सबसे अधिक निशाने पर
आंकड़ों का सबसे भयावह पहलू आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा है। 2024 में राज्य में आदिवासी महिलाओं से रेप के 358 मामले दर्ज हुए, जो पूरे भारत का 28% है। इसके अलावा, POCSO के तहत आदिवासी बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले भी 132 से बढ़कर 137 हो गए हैं। अपहरण और जबरन शादी के लिए मजबूर करने के मामलों में भी MP और गुजरात संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं।
इंसानियत को शर्मसार करती घटनाएं
रिपोर्ट में इंदौर की उस घटना का जिक्र है जहां एक आदिवासी युवक से सरेराह जूते के फीते बंधवाए गए। वहीं, सिंगरौली में अवैध रेत उत्खनन रोकने पर आदिवासी किसान इंद्रपाल अगरिया को ट्रैक्टर से कुचल दिया गया। इन घटनाओं ने साबित किया है कि आंकड़े केवल नंबर नहीं, बल्कि जमीन पर आदिवासियों के साथ हो रही बर्बरता की गवाही दे रहे हैं।

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