मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर मंडराया संकट! सुप्रीम कोर्ट की दो टूक- 'चलाओ केस'
भोपाल/दिल्ली।
मध्य प्रदेश की राजनीति में इस वक्त भूचाल आ गया है। प्रदेश के कद्दावर आदिवासी नेता और कैबिनेट मंत्री विजय शाह की मुश्किलें अब कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सेना की जांबाज बेटी सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ प्रोसीक्यूशन (अभियोजन) की तत्काल अनुमति दी जाए। कोर्ट की इस सख्ती के बाद अब सरकार के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं: मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की हरी झंडी दें। आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटिशन (पुनर्विचार याचिका) में जाकर समय खींचें।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला सेना की महिला अधिकारी सोफिया कुरैशी से जुड़ा है, जिन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' में अहम भूमिका निभाई थी। आरोप है कि विजय शाह ने उन्हें 'आतंकियों की बहन' कहकर संबोधित किया था। इस अपमानजनक टिप्पणी पर उस वक्त के हाई कोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन ने खुद संज्ञान लिया था और FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे।
SIT की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी SIT ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में मंत्री विजय शाह को लेकर चौंकाने वाली बात कही है। रिपोर्ट के मुताबिक विजय शाह 'विवादित बयान देने के आदि' हैं। उन पर दो वर्गों के बीच अशांति फैलाने की धाराएं सही पाई गई हैं। हालांकि, देशद्रोह की धारा को हटा दिया गया है, लेकिन अन्य आरोप अभी भी बरकरार हैं।
नैतिकता या वोट बैंक: मोहन यादव सरकार की अग्निपरीक्षा
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि भाजपा के लिए यह मामला गले की हड्डी बन गया है। मध्य प्रदेश में करीब 21% आदिवासी वोट हैं, जिसके चलते पार्टी विजय शाह पर कड़ा एक्शन लेने से बच रही है। इससे पहले शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी अपनी 'भाभी' (साधना सिंह) पर टिप्पणी करने के कारण शाह को इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन बाद में उनकी वापसी हो गई थी। "क्या मंत्री की टिप्पणी अंग्रेजों की लूट और महिलाओं के अपमान जैसी नहीं है? अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव नैतिकता के आधार पर इस्तीफा लेंगे या दिल्ली के इशारे का इंतजार करेंगे?"

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