महा-विलय की तैयारी: MP में खत्म होगा PHE विभाग का वजूद! पंचायत विभाग में मर्ज करने का गोपनीय प्लान तैयार!
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त एक बड़ी और 'टॉप सीक्रेट' सर्जरी की तैयारी चल रही है। वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र जैन की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE), जो दशकों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था संभाल रहा था, अब इतिहास बनने जा रहा है। सरकार इस पूरे विभाग को मध्य प्रदेश ग्रामीण एवं पंचायत विभाग में विलय (Merge) करने का गोपनीय प्लान तैयार कर चुकी है और इसकी फाइलें तेजी से दौड़ रही हैं। 1994 से लेकर अब तक पीएचई विभाग को लगातार छोटा किया गया है। पहले शहरों में जल प्रदाय और सीवेज का काम इससे छीनकर नगर निगमों को दे दिया गया और अब इसके पास केवल ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप खोदने और उनके संधारण का सीमित काम बचा है। इसी आधार पर सरकार अब इसे स्वतंत्र विभाग के बजाय पंचायत विभाग का एक हिस्सा बनाने जा रही है। इस फैसले से विभाग के लगभग 14 हजार कर्मचारियों का भविष्य सीधे तौर पर प्रभावित होगा, जिनमें इंजीनियरों से लेकर संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी तक शामिल हैं। इस पूरी कवायद के बीच सबसे गंभीर खुलासा जल निगम को लेकर हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जहां एक तरफ पीएचई विभाग को खत्म किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ 'जल निगम' को अधिकारियों की सुरक्षा के लिए बचाए रखा जा सकता है। आरोप है कि जल निगम इस समय मध्य प्रदेश में टेंडर और कमीशनखोरी का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है, जिसके पास 33,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रोजेक्ट्स हैं। अधिकारी इसे इसलिए बचाना चाहते हैं क्योंकि उनके 'निजी हितों' की पूर्ति यहीं से होती है। अब देखना यह है कि आने वाले 6 महीनों में यह प्रशासनिक फेरबदल क्या रूप लेता है और क्या यह विलय वाकई जनता के हित में होगा या सिर्फ भ्रष्टाचार का नया रास्ता बनेगा।

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