भोपाल/दतिया। 
राजनीति में कब, कौन सा 'स्वाद' हिट हो जाए, कहा नहीं जा सकता। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा इन दिनों कुछ इसी अंदाज में नजर आ रहे हैं। दतिया की रिक्त हुई विधानसभा सीट पर उपचुनाव की आहट क्या हुई, 'दादा' का अंदाज पूरी तरह बदल गया है। हाल ही में भाजपा कार्यालय में कुछ ऐसा नजारा दिखा, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कार्यकर्ताओं का स्वागत माला-साफे से तो हुआ ही, लेकिन असली सुर्खियां बटोरीं नरोत्तम मिश्रा की झालमुड़ी ने।
"झालमुड़ी... झालमुड़ी..." और जुट गई भीड़
नरोत्तम मिश्रा इस दौरान किसी मझे हुए झालमुड़ी विक्रेता के अंदाज में आवाज लगाते दिखे। वे बाकायदा पुकार रहे थे— ‘झालमुड़ी... झालमुड़ी...’। उनकी आवाज सुनकर कार्यकर्ता भी मुस्कुराते हुए पास आए और पूर्व मंत्री के हाथों से झालमुड़ी का दोना थाम लिया। सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
आखिर क्यों बदली नरोत्तम की 'रंगत'?
जानकारों की मानें तो यह महज नाश्ता नहीं, बल्कि चुनावी बिसात है। इसके पीछे के तीन बड़े कारण समझ लीजिए:
उपचुनाव की तैयारी, दतिया सीट रिक्त है। नरोत्तम मिश्रा अपनी हार का हिसाब बराबर करने के लिए मैदान में उतरने को बेताब हैं। प्याऊ का उद्घाटन करना हो या कार्यकर्ताओं को अपने हाथ से झालमुड़ी बांटना— संदेश साफ है कि वे जनता और कार्यकर्ताओं के बीच 'आम आदमी' बनकर पैठ बनाना चाहते हैं।
सियासत की चटपटी झालमुड़ी
सियासत में झालमुड़ी अब 'गारंटी' का प्रतीक मानी जाने लगी है। जब चुनाव दहलीज पर हों, तो जनता का दिल जीतने के लिए हर जायका आजमाया जाता है।"जब कुर्सी के लिए 'क्रेज' कम न हुआ हो, तो फिर चाहे प्याऊ खोलना पड़े या झालमुड़ी की आवाज लगानी पड़े— चुनावी जंग जीतने के लिए सब जायज है। देखना दिलचस्प होगा कि झालमुड़ी का यह चटपटा स्वाद उपचुनाव में वोटरों को कितना लुभा पाता है।"