भोपाल। 
मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों में एक बार फिर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। भोपाल और ग्वालियर नगर निगम में 'सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी' जैसे महत्वपूर्ण पदों पर ऐसी नियुक्तियों का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर फर्जी और अमान्य डिग्रियों के आधार पर की गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा आयोजित ग्रुप-2, सब-ग्रुप-4 भर्ती परीक्षा 2022 के माध्यम से ये नियुक्तियां हुई थीं। शिकायत के अनुसार, दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के दौरान अधिकारियों ने उन प्रमाण पत्रों को भी हरी झंडी दे दी, जो फर्जी या ब्लैकलिस्टेड संस्थानों से जारी किए गए थे।
जांच के घेरे में कौन?
शिकायत में मुख्य रूप से दो नाम और उनके संस्थानों पर सवाल उठाए गए हैं:
काबिल सिंह राजौरिया: इन्होंने 'राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट' से डिग्री पेश की, जिसे UGC द्वारा ब्लैकलिस्टेड बताया गया है।
अभिषेक मिश्रा: इन्होंने 'संघाई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, मणिपुर' की डिग्री लगाई, जिसकी वैधता संदिग्ध है।
नियमों की अनदेखी

भर्ती नियमों के मुताबिक, इन पदों के लिए UGC या AICTE से मान्यता प्राप्त संस्थान से ही डिग्री होना अनिवार्य था। सवाल उठ रहे हैं कि सत्यापन के समय इन फर्जी दस्तावेजों को पकड़ा क्यों नहीं गया? क्या यह विभाग की लापरवाही है या किसी बड़े रैकेट की मिलीभगत?
कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने इसे सीधे तौर पर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला बताते हुए IPC की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन से अपील की गई है कि इन नियुक्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए। संबंधित उम्मीदवारों और सत्यापन करने वाले अधिकारियों पर FIR दर्ज हो।  पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए। यह मामला केवल दो नियुक्तियों का नहीं है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन और सरकार इस पर क्या कड़ा कदम उठाती है।