भोपाल,सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। हाल ही में आई कैग (CAG) की रिपोर्ट और विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने शिवराज सरकार से लेकर वर्तमान मोहन यादव सरकार तक के दावों की पोल खोलकर रख दी है। राज्य की 9 करोड़ जनता के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है कि प्रदेश के भविष्य को 'अंधेरे' में धकेला जा रहा है।
स्कूल शिक्षा: गुरु बिन ज्ञान कैसे?
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के 1895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। सवाल यह उठता है कि अगर शिक्षक ही नहीं हैं, तो वहां बच्चे क्या पढ़ रहे हैं? उनकी मार्कशीटें कैसे बन रही हैं और वे पास कैसे हो रहे हैं? यह सीधे तौर पर करोड़ों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और 'फर्जीवाड़ा' है।
उच्च शिक्षा का बुरा हाल: खाली पड़े हैं खंडहरनुमा विश्वविद्यालय
विधानसभा में उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा दी गई जानकारी और भी डराने वाली है। प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में 70 से 75 प्रतिशत तक प्राध्यापकों के पद खाली हैं।

  • बरकतुल्लाह विवि (भोपाल): 105 में से 69 पद खाली।
  • रानी दुर्गावती विवि (जबलपुर): 156 में से 138 पद खाली।
  • राजा शंकर शाह विवि (छिंदवाड़ा): 175 में से 175 यानी सभी पद खाली।
  • छिंदवाड़ा, गुना और सागर जैसे कई विश्वविद्यालयों में तो एक भी स्थाई शिक्षक की नियुक्ति नहीं है।

'फर्जी मार्कशीट' का अड्डा बनता जा रहा प्रदेश
वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र जैन के अनुसार, मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालय अब 'डिग्री बांटने वाली दुकानों' में तब्दील हो रहे हैं। हाल ही में कानपुर में पकड़ी गई फर्जी मार्कशीटों में से 103 मार्कशीटें मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों की थीं। जब पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं होंगे, तो केवल कागजों पर डिग्रियां ही बटेंगी, ज्ञान नहीं।
सरकार की प्राथमिकता: शिक्षा या फ्रीबीज?
जानकारों का आरोप है कि सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। एक ओर सरकार 'लाड़ली बहना' जैसी योजनाओं और विज्ञापनों पर हजारों करोड़ खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के लिए बजट की कमी का रोना रोया जाता है। क्या सरकार जानबूझकर अगली पीढ़ी को 'अकुशल' और 'नकारा' बनाए रखना चाहती है ताकि वे केवल चुनावी रेवड़ियों पर निर्भर रहें?
प्रदेश के ब्रच्चों का डूबता भविष्य... 
"हिंदू-मुस्लिम और राष्ट्रवाद की बहसों के बीच क्या मध्य प्रदेश की जनता अपने बच्चों के डूबते भविष्य को देख पा रही है? अगर स्कूल-कॉलेज में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो कैसा बनेगा विकसित मध्य प्रदेश?"