शिवराज पर एफआईआर की तैयारी! रिटायर्ड IFS ऑफिसर ने खोला मोर्चा; बोले— "वोट बैंक के लिए नर्मदा और जंगलों को किया छलनी, अब कोर्ट में होगी लड़ाई"
भोपाल।
राजनीति में रसूखदारों के खिलाफ आवाज उठाना लोहे के चने चबाने जैसा है, लेकिन मध्य प्रदेश कैडर के एक रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी ने वह कर दिखाया है जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। वरिष्ठ वन अधिकारी आजाद सिंह डबास ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कानूनी जंग छेड़ दी है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने कदम नहीं उठाए, तो वे एमपी-एमएलए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
वोट के लिए 'वन' का सत्यानाश?
डबास का आरोप है कि शिवराज सिंह चौहान ने अपने निर्वाचन क्षेत्र बुधनी और आसपास के इलाकों (लाडकोई, नसरुल्लागंज) में केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए घने जंगलों को बर्बाद कर दिया। आरोप है कि 2020 में सत्ता में वापसी के तुरंत बाद, बिना किसी जांच के 1300 पट्टे बांट दिए गए। डबास का यह भी दावा है कि ये पट्टे उन लोगों को दिए गए जो वहां के मूल निवासी ही नहीं हैं, बल्कि बाहरी क्षेत्रों से आकर जंगलों पर कब्जा जमाए हुए हैं। डबास ने इसे 'जघन्य अपराध' की श्रेणी में रखा है। उनका कहना है कि एक तरफ नर्मदा किनारे पौधे लगाने का ढोंग किया गया, वहीं दूसरी तरफ हजारों एकड़ वन भूमि को अतिक्रमणकारियों के हवाले कर दिया गया।
"अधिकारी बने गुलाम, अब कोर्ट ही सहारा"
सबकी खबर के साथ एक पॉडकॉस्ट में आजाद सिंह डबास ने तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में डीएफओ और कलेक्टर नेताओं के हाथ की कठपुतली बन गए हैं। अधिकारी अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में पर्यावरण का विनाश मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं। डबास ने खुलासा किया कि बुधनी क्षेत्र में 850 सागौन की सिल्लियां पकड़ी गईं, लेकिन स्थानीय स्टाफ की हिम्मत नहीं हुई कि वे रसूखदारों पर हाथ डाल सकें। उन्होंने 2017 के उस चर्चित पौधरोपण अभियान पर भी सवाल उठाए, जिसमें 7 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया था। डबास के मुताबिक, जमीन पर 7 लाख पौधे भी जीवित नहीं हैं।
अगला कदम: एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट
आजाद सिंह ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि शिवराज सिंह चौहान समेत उन तमाम आला अधिकारियों (पूर्व ACS और PCCF) पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने अपनी आंखों के सामने नियमों की धज्जियां उड़ते देखीं। यदि विभाग एफआईआर नहीं करता, तो वे साक्ष्यों के साथ अदालत जाएंगे।
साख बनाम सच्चाई
क्या मध्य प्रदेश में सत्ता के सबसे शक्तिशाली चेहरे पर एफआईआर हो पाएगी? क्या एक रिटायर अधिकारी का 'वन रक्षक' अवतार शिवराज सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ाएगा? यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि एक बड़े कानूनी और राजनीतिक संग्राम की आहट दे रहा है।

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