भोपाल। 
प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से गुरुवार को रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में “कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने “मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड”, “सीएम किसान हेल्पलाइन” और “पैक्स सदस्यता वृद्धि अभियान” का शुभारंभ किया। इस कार्यशाला में प्रदेशभर से जिला, ब्लॉक, क्लस्टर और ग्राम पंचायत स्तर के 1027 से अधिक कर्मचारी शामिल हुए। कृषि, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, कृषि अभियांत्रिकी, बीज निगम और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों ने भी भागीदारी की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसान कॉल सेंटर पर स्वयं कॉल कर इसकी कार्यप्रणाली को परखा। उन्होंने एक सामान्य किसान की तरह सवाल पूछा, जिस पर कॉल सेंटर कर्मचारी ने जवाब दिया और अधिकारियों द्वारा संपर्क किए जाने की बात कही। कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री लखन पटेल और मछुआ कल्याण मंत्री नारायण सिंह पवार सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
सीएम ने कॉल सेंटर पर खुद किया कॉल
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसान कॉल सेंटर पर स्वयं कॉल कर इसकी कार्यप्रणाली को परखा। उन्होंने एक सामान्य किसान की तरह सवाल पूछा, जिस पर कॉल सेंटर कर्मचारी ने जवाब दिया और अधिकारियों द्वारा संपर्क किए जाने की बात कही।
16 विभागों को एक मंच पर लाने की पहल
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसान कल्याण से जुड़े 16 विभागों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाना अपने आप में बड़ा दायरा है। शुरुआत में यह तय करना मुश्किल था कि किन विभागों को शामिल किया जाए, क्योंकि किसी न किसी रूप में लगभग हर विभाग किसान हित से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा जैसे विभागों को अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि गांव की सड़क से लेकर स्कूल-कॉलेज तक सब कुछ किसान कल्याण से जुड़ता है। ऐसे में एक सीमित दायरे में इन सभी को समाहित करने का प्रयास किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यानिकी और कृषि को भाई-बहन की तरह देखा गया है, जबकि सहकारिता के अंब्रेला के नीचे पशुपालन, मत्स्य पालन, नर्सरी और अन्य गतिविधियों को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि आज की कार्यशाला केवल कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके लिए भी एक तरह का प्रशिक्षण है। नए प्रयोग करते समय आनंद और सकारात्मकता बनाए रखना जरूरी है, तभी उसका असर काम में दिखता है।