भोपाल।
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार की प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र को लेकर की गई याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने कड़ा रुख अपनाया है।जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की डबल बेंच ने साफ कहा कि पिछले लगभग 1 वर्ष से इस मामले की जांच लंबित क्यों रखी गई और इसे दबाकर क्यों रखा गया।
प्रतिमा बागरी ने मानहानि नोटिस देने की चेतावनी दी थी, 1 साल से नोटिस नहीं आया-अहिरवार
वहीं प्रदीप अहिरवार ने कहा है कि जब उन्होंनें प्रतिमा बागरी पर जाति प्रमाण पत्र को लेकर आरोप लगाए थे तो उन्होंने मुझे मानहानि नोटिस देने की चेतावनी दी थी, लेकिन 1 साल हो गया इंतजार करते-करते,  अभी तक कोई नोटिस नहीं आया है। जबकि मैने उनको अपना पता भी बताया है। अहिरवार ने कहा कि  नोटिस  इसलिए नहीं मिला क्योंकि वो राजपूत जाति से आती हैं। कई बार SDM पैसे लेकर फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं जिनका दुरुपयोग होता है। इससे आरक्षित वर्ग के लोगों को हानि पहुंचती है।
अब प्रतिमा बागरी मे जरा भी नैतिकता है, तो इस्तीफा दें, वैसे उनमें नैतिकता तो बची नहीं है क्योंकि उनकी भाई भी गांजा का व्यापार करते हैं। लेकिन जिस तरह से कोर्ट आदेश हुआ है उसके मुताबिक उनकी विधायकी जाएगी और फिर से चुनाव होगा।
प्रदीप अहिरवार का कहना है कि प्रतिमा बागरी ने, सामान्य वर्ग के राजपूत बागरी/ बागड़ी समाज से संबंध रखने के बावजूद अनुसूचित जाति वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है। राजपूत होने के बाद भी प्रतिमा ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया और मंत्री बन गई।